अब वो बात कहां। आज अगर ऐसा हो जाए कि फलां व्यक्ति ने फलां को वोट दिया है तो जीवन भर मन में टीस रखकर रंजिश पाले रहता है। मगर पहले चुनाव की बात करें तो ग्राम पंचायत स्तर पर मतदाताओं को बैठाकर हाथ उठवाकर समर्थन जुटाया गया था। उसी से विधायक चुने गए थे। अपने जिले की 8 सीटों पद 10 विधायक निर्वाचित हुए। खास बात है कि उस समय हाथरस जनपद भी अलीगढ़ का हिस्सा था और हाथरस-सासनी व खैर-बरौली जिले की सर्वाधिक क्षेत्रफल वाली सीटें थीं। चूंकि आजादी के बाद लोकतांत्रिक सिस्टम तैयार किया जा रहा था, इसलिए इन दोनों सीटों पर बिना अलग नाम दिए दो-दो विधायक निर्वाचित किए गए, जिनमें एक सामान्य वर्ग और दूसरा आरक्षित वर्ग से था। हां, इनके कार्यक्षेत्र जरूर विभाजित थे।
12 राष्ट्रीय व दो राज्य स्तरीय दल थे पंजीकृत
जिले की राजनीति के जानकार योगेश शर्मा बताते हैं कि आजादी के बाद जब लोकतांत्रिक सिस्टम खड़ा किया जा रहा था, तब 1951/52 में यूपी विधानसभा चुनाव हुए थे। वे बताते हैं कि उस समय राष्ट्रीय पार्टी के रूप में अखिल भारतीय कांग्रेस, भारतीय जनसंघ, बोलसेवक पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी, फारवर्ड ब्लाक, अखिल भारतीय हिंदू महासभा, किसान मजदूर प्रजा पार्टी, रेवोलेशनरी कम्युनिस्ट पार्टी, अखिल भारतीय राम राज्य परिषद, रेवोलेशनरी सोशलिस्ट पार्टी, ऑल इंडिया सेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन, सोशलिस्ट पार्टी पंजीकृत थीं, जबकि यूपी प्रजा पार्टी और यूपी रेवोलेशनरी सोशलिस्ट पार्टी राज्य स्तरीय दल के रूप में पंजीकृत थे। इन्हीं दलों के प्रत्याशियों ने पूरे प्रदेश में चुनाव लड़ा था। सभी दलों ने उस समय आजादी आंदोलन में सक्रिय रहे नेता या समाज व क्षेत्र में अपनी बेहतर छवि के दम पर अच्छी पकड़ रखने वाले नेताओं को टिकट दिया गया था।
जिले की सभी सीटों पर कांग्रेस ने परचम लहराया
कांग्रेस ने हाथरस के रहने वाले नंदकुमार देव वशिष्ठ, हरदयाल सिंह को हाथरस-सासनी सीटों पर लड़ाया और जीते। इसी तरह इगलास के दिग्गज जाट नेता व स्वतंत्रता सेनानी आंदोलन से जुड़े समाजसेवी शिवदान सिंह इगलास से विधायक बने। खैर-बरौली से घुड़ियाबाग के रहने वाले स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े अनुसूचित नेता रामप्रसाद देशमुख व बरौली क्षेत्र के दिग्गज स्वतंत्रता सेनानी मोहनलाल गौतम को विधायक निर्वाचित कराया। मुख्य शहर से मुस्लिम नेता नफीसुल हसन निर्वाचित हुए। अतरौली नॉर्थ यानी गंगीरी-छर्रा से अकराबाद के स्वतंत्रता सेनानी कुं. श्रीनिवास शर्मा, अतरौली से कस्बे के ही स्वतंत्रता सेनानी राजाराम अरोरा, अलीगढ़ देहात/कोल क्षेत्र से पाली रजापुर के स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर नेत्रपाल सिंह व सिकंदराराऊ से वहीं के नेकराम शर्मा विधायक बने। ये सभी कांग्रेस की टिकटों पर चुनाव जीते थे।
इस चुनाव के बाद क्षेत्रवार चयनित हुए सीटों के नाम
इस चुनाव के बाद चूंकि कई सीटों का क्षेत्रफल बेहद बड़ा था। तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को दुरुस्त करते हुए क्षेत्रवार सीटों के नाम चयनित किए गए और धीरे-धीरे व्यवस्थाएं दुरुस्त होती चली गईं।
ये थे विधानसभा सीट वार विधायक
1-हाथरस-नंद कुमार देव वशिष्ठ (हाथरस क्षेत्र)
2-हाथरस-हरदयाल सिंह (आरक्षित वर्ग, सासनी क्षेत्र)
3-इगलास-शिवदान सिंह
4-खैर कम कोल नॉर्थ वेस्ट-रामप्रसाद देशमुख (आरक्षित वर्ग, खैर क्षेत्र)
5-खैर कम कोल नॉर्थ वेस्ट-मोहनलाल गौतम (बरौली क्षेत्र)
6-कोल सेंट्रल-नफीसुल हसन (अलीगढ़ शहर क्षेत्र)
7-अतरौली नॉर्थ-कुं.श्रीनिवास (गंगीरी/छर्रा क्षेत्र)
8-अतरौली साउथ कम कोल ईस्ट-राजाराम अरोरा (अतरौली क्षेत्र)
9-सिकंदराराऊ नॉर्थ कम कोल साउथ ईस्ट-नेत्रपाल सिंह (कोल/अलीगढ़ देहात क्षेत्र)
10-सिकंदराराऊ साउथ-नेकराम शर्मा (सिकंदराराऊ क्षेत्र)