चुनाव प्रचार में अब हर दल के बड़े नेताओं की चुनावी सभाएं होंगी। इसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। यूपी में चुनाव के लिए अलग-अलग दल के आठ नेताओं को सुरक्षा एएसएल (एडवांस सिक्योरिटी लाइजनिंग) सिस्टम के तहत होगी। गृह मंत्रालय से इसके लिए एडवाइजरी जारी है। इन नेताओं की सिक्योरिटी का पूरा खाका इसी सिस्टम के तहत खींचा जाएगा और सभा से 24 घंटे पहले ही हर कीमत पर सारे मानक पूरे कर लिए जाएंगे।
चुनावी प्रचार के लिए नेताओं का आगमन अब शुरू होने वाला है। इसके लिए सुरक्षा एजेंसियोें ने भी कमर क स ली है। यहां भाजपा, बसपा, सपा, कांग्रेस व अन्य दलोेें के नेता प्रचार करने के लिए आएंगे लेकिन देश के मुख्य आठ चुनाव प्रचारकों की सुरक्षा एएलएस सिस्टम के तहत होगी। इसमें भाजपा से पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा पूर्व डिप्टी पीएम लालकृष्ण आडवाणी शामिल हैं।
हालांकि आडवाणी भाजपा की चुनाव प्रचारकोें की लिस्ट में नहीं हैं। कांग्रेस के तीन स्टार प्रचारक राहुल गांधी, सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी भी इसी श्रेणी में हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती की सुरक्षा भी एएसएल सिस्टम के तहत होती है। इसके तहत नेताओं का कार्यक्रम मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो जाएंगी। नेताओं का पद और कद देखते हुए उन्हें इस श्रेणी में रखा गया है।
पहले यह देखा जाएगा कि कार्यक्रम स्थल की भौगोलिक क्या स्थिति है। वहां आस-पास कितने भवन हैं और इनका साइज क्या है। यही नहीं वहां किस वर्ग के लोग रहते हैं। इसकी बिंदुवार समीक्षा की जाएगी। इतना ही नहीं सेफ हाउस भी उसी हिसाब से बनाए जाएंगे।
सभा स्थल पर अनुमान से कितनी भीड़ आएगी। उसी हिसाब से ‘डी’ घेरा बनाया जाएगा। यदि भीड़ के चलते कार्यक्रम बिगड़ता है या फिर भीड़ उग्र होगी तो फिर किस स्थान से सिक्योरिटी पाने वाले नेता को वहां से ले जाया जाएगा। इसका भी ध्यान इस सिस्टम में रखा गया है।
कार्यक्रम स्थल के उसी हिसाब से द्वार बनाए जाएंगे। आतंकी घुसपैठ होने पर क्या कदम उठाने हैं। इसका भी खाका खींचा जाएगा। भीड़ की तादाद को देखते हुए सुरक्षा का पूरा प्लान तैयार होगा। एएसएल सिस्टम के तहत इन आठ नेताओं की सभा होने से 24 घंटे पहले पूरी तैयारी कर ली जाएगी। अब चूंकि इस श्रेणी में आने वाले नेताओं के कार्यक्रम यहां प्रशासन के मिलने लगे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसी भी अपने काम में जुट गई हैं।