दो पहिया वाहन चलाना सीखना हो या चौपहिया, अब आने वाले दिनों में इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि आईटीआई परिसर के अंदर चार साल में पांच करोड़ रुपये से ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनकर तैयार हो गया है। जल्द ही यह परिवहन विभाग के हाथों में आ जाएगा। अब छोटे बड़े सभी वाहनों को चलाने का प्रशिक्षण यहीं दिया जाएगा। हस्तांतरण से पहले जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच समिति की रिपोर्ट मिलना बाकी है।
अब तक जिले में करीब दर्जन भर निजी मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालित हैं. लेकिन, ज्यादातर के पास ड्राइविंग सिखाने के लिए अपना निजी स्थान नहीं है। शहर के मैदानों व सड़कों पर लोग गाड़ियां चलाना सीखते हैं। इससे ड्राइविंग की बारीकियों से लोग वंचित रह जाते हैं। साथ ही हादसे की आशंका भी रहती है। 2018 में पांच करोड़ दो लाख रुपये की लागत से ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के निर्माण का प्रस्ताव पास हुआ, जिसके पूरा करने की अवधि दिसंबर 2020 रखी गई थी। दो साल की देरी से यह इंस्टीट्यूट तैयार हुआ है और हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एआरटीओ प्रशासन रंजीत सिंह ने बताया कि कुछ ही दिनों में जांच रिपोर्ट आने के बाद यह हमारे हाथों में होगा। जल्द से जल्द इंस्टीट्यूट का संचालन शुरू कराएंगे।