श्रीमद्भागवत कथा में संत कार्ष्णि बाल योगी ने संस्कार पर अपने विचार व्यक्त किए। संत कार्ष्णि बाल योगी ने कहा कि सुनीति ने ध्रुव को, कौशल्या ने राम को और सुमित्रा ने लक्ष्मण को संस्कार दिये। संगति का प्रभाव महत्वपूर्ण होता है। संतों का संग करने पर ज्ञान मिलेगा। दुष्टों का संग करने पर ज्ञान का नाश होगा।
बच्चे की प्रथम गुरु मां होती है। मां ही संतान को संस्कार दे सकती है। जिस बच्चे को बाल्यावस्था में ही संस्कार मिल गए उसका कल्याण हो गया है। यह बात श्रीमद्भागवत कथा में संत कार्ष्णि बाल योगी ने व्यक्त किये। कहा कि सुनीति ने ध्रुव को, कौशल्या ने राम को और सुमित्रा ने लक्ष्मण को संस्कार दिये। संगति का प्रभाव महत्वपूर्ण होता है। संतों का संग करने पर ज्ञान मिलेगा। दुष्टों का संग करने पर ज्ञान का नाश होगा। मोबाइल व टीवी ने हमारे संस्कार को बिगाड़ा है।
संत कार्ष्णि बाल योगी ने कहा कि बेटियों को ध्यान रखना चाहिए, जैसे हीरा को संभाल कर रखा जाता है, वैसे ही माता-पिता उनकी चिंता करते हैं। बेटियां जगत का आधार हैं। हमारी संस्कृति का आधार हैं। कहा कि परिवार का कोई सदस्य क्रोध में हो तो स्वयं को शांत रखें, अथवा वहां से हट जाएं।