जिले में सरकारी दफ्तरों में वित्तीय वर्ष समाप्ति को लेकर लेखा- जोखा बंदी का दबाव बढ़ गया है। विकास अफसर मिले बजट को ठिकाने पर लगाने में जुट गए हैं। करोड़ों के मिले बजट को खर्च करने को यह अंतिम सप्ताह है। विभागीय अफसर एवं लेखा विभाग से जुड़े कर्मचारी हिसाब- किताब मिलाने के साथ ही बचे हुए बजट को खर्च करने में दिन-रात जुटे हुए हैं।
वरिष्ठ जिला कोषाधिकारी महिमा चंद्र ने बताया कि सभी विभागों को अपने खर्च किए बजट का विवरण प्रस्तुत करने को पत्र भेजा गया है। उन्होंने बताया कि जिले के करीब 94 विभागों को मिले बजट को लेकर ब्योरा तैयार कराया जा रहा है। विभागों की सही स्थिति 31 मार्च की रात 12 बजे के बाद ही साफ हो सकेगी। कई ऐसे विभाग भी हैं, जहां पूरे साल बजट ही नहीं मिल सका। संवाद