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कभी डेंगू के डंक से सुरक्षित था अलीगढ़

Sun, 27 Sep 2015 01:49 AM IST
अलीगढ़।
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कभी डेंगू के डंक से सुरक्षित था अलीगढ़
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दीपक शर्मा
अलीगढ़। आज भले ही अलीगढ़ में डेंगू का मच्छर पैर पसार चुका हो लेकिन एक वक्त था जब अलीगढ़ में इस प्रकार की वनस्पति और वातावरण था कि यहां डेंगू के मच्छर का नामोनिशान नहीं था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए  सर सैयद ने मोअम्डन एंग्लो ओरियंटल कॉलेज की स्थापना अलीगढ़ में की थी। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के म्यूजियोलोजी डिपार्टमेंट के संस्थापक प्रो. इफ्तेखार आलम ने इस बात का जिक्र अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘सर सैयद और फन-ए-तामीर’ में विशेष तौर पर किया है। प्रो. आलम कहते हैं कि  कालेज के लिए अलीगढ़ का चयन करने से पहले सर सैयद अहमद ने तत्कालीन सिविल सर्जन के नेतृत्व में एक कमेटी गठित करवाई थी जिसमें इस बात की रिपोर्ट दी थी कि अलीगढ़ की आब-ओ-हवा बेहद मुफीद है। इसके बाद ही सर सैयद अहमद ने यहां पर स्कूल स्थापित करने का फैसला किया था। लेकिन आज यह इलाका डेंगू की जबरदस्त चपेट में है। अब तक यहां पर 400 से ज्यादा मरीज डेंगू के प्रकाश में आ चुके हैं और 15 से ज्यादा डेंगू से मौत हो चुकी हैं।
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दवा का जहर हो रहा बेअसर
अलीगढ़। पिछले 12 वर्षों से नगर निगम फागिंग के दौरान मच्छर मारने के लिए मेलाफ्योन नाम की दवा का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन अब देखने में आ रहा है कि मच्छरों पर यह दवा पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं। मच्छरों ने इस दवा का एंटी बॉडी अपने अंदर विकसित कर लिया है। जिन क्षेत्रों में इस दवा का छिड़काव हो रहा है कि वहां मच्छरों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुलदीप कुमार कहते हैं कि 19 लीटर डीजल में 1 लीटर दवा मिलाई जाती है। इसको पेट्रोल से चलने वाली मशीन के जरिए छिड़का जाता है। यह दवा पिछले 12 वर्षों से प्रयोग हो रही है। शासन की ओर से दवा बदलने का निर्देश होगा तो पालन किया जाएगा।
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