अंडला में प्रस्तावित डिफेंस कॉरिडोर प्रकरण में किसानों का रुख नरम पड़ने लगा है। बुधवार को भाकियू नेताओं के साथ एक प्रतिनिधि मंडल एसडीएम खैर अंजनी कुमार से मिला और बीच का रास्ता तलाशने की गुजारिश की। गौर हो कि प्रशासन यहां पर सर्किल रेट का दोगुना मुआवजा देकर जमीन लेने की बात कह चुका है, वहीं किसान चार गुना मुआवजा और एक सरकारी नौकरी पर अड़े हैं। किसानों के तेवर देख कर प्रशासन जमीन अधिग्रहित करने का विचार छोड़ चुका है। जिसके बाद किसानों के तेवर कुछ ढीले पड़ रहे हैं।
बहरहाल, भारतीय किसान यूनियन हरपाल गुट के अध्यक्ष हरपाल सिंह के साथ जिलाध्यक्ष विजय सिंह, खैर ब्लाक अध्यक्ष चोब सिंह तेवतिया, शिवचरन रावत, छेदालाल शर्मा, महावीर प्रसाद, शिवकुमार शर्मा सहित आठ सदस्यीय प्रतिनधिमंडल बुधवार को एसडीएम खैर अंजनी कुमार से मिला और नए सिरे से अपना प्रस्ताव रखा। भाकियू और किसानों का कहना था कि अगर किसान इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए कुछ समझौता कर सकते हैं तो शासन प्रशासन को भी हठधर्मिता छोड़ कर उनकी पेशकश गंभीरता से सुननी चाहिए, जिससे डिफेंस कॉरिडोर का बड़ा प्रोजेक्ट अंडला में विकसित हो और विकास हो।
इन लोगों ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए अंडला, हैवतपुर, तेहरा की भूमि पूरे जिले में सबसे बेहतर है, क्योंकि ये अलीगढ़ पलवल फोरलेन स्टेट हाईवे पर है। इसके ठीक पास एलपीजी गैस बॉटलिंग प्लांट है। यमुना एक्सप्रेस वे नजदीक है। भविष्य में यहीं पर ट्रांसपोर्ट नगर, स्टेट यूनिवर्सिटी बसाने की योजना है। यमुना एक्सप्रेस वे के पास जेवर हवाई अड्डा बनने जा रहा है। इसलिए डिफेंस कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए इधर-उधर जमीन देखने की जरूरत या औचित्य नहीं है। भाकियू या किसान विकास विरोधी नहीं है। हां, शासन प्रशासन भी पूंजीपतियों की तरफ ज्यादा न सोच कर कुछ किसानों के हित में भी सोचे।
चौ. हरपाल ने कहा है कि शासन प्रशासन बीच का रास्ता निकाले तो जमीनों का अधिग्रहण कुछ ही दिन में पूरा हो सकता है। इस पूरे प्रकरण में उन लोगों ने गलतफहमी पैदा की है, जिनकी जमीन इस प्रोजेक्ट में नहीं जा रही है। ऐसे लोग किसानों और प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं। इधर, किसानों से मुलाकात और उनकी पेशकश पर एसडीएम खैर अंजनी कुमार ने कहा है कि अब जमीन नहीं लेने का फैसला हो चुका है, इसलिए फिलहाल कुछ कहना उचित नहीं है। हां, किसानों की पेशकश प्रशासन को पहुंचा दी गई है। अगर प्रशासन भविष्य में इस संबंध में कोई फैसला करता है कि जमीन अधिग्रहित होनी है तो किसानों से बात होगी। किसानों से वार्ता कर उनकी सहमति से ही जमीन ली जाएगी।
अब क्या कह रहे किसान
35 बीघा जमीन है, हम दूसरे किसानों के साथ एसडीएम से मिले। हमने बीच का रास्ता निकालने और किसानों से पुन: वार्ता करने को कहा है। जिससे अंडला में ही ये प्रोजेक्ट लगे और यहां का समूचा विकास हो सके। अब प्रशासन का फैसला आने का इंतजार है। -प्रमोद शर्मा
10 बीघा जमीन है। जमीन ही सब कुछ है। हम प्रशासन से कॉरिडोर विकसित करने को कह रहे हैं। इसके लिए अगर किसान कुछ कदम पीछे हट सकते हैं तो प्रशासन को भी कुछ कदम आगे बढ़ा कर बात शुरू करनी चाहिए। जिससे ये प्रोजेक्ट अंडला में ही विकसित हो सके। -छेदालाल
जमीन देने के लिए किसानों की शर्त कोई बड़ी नहीं है। जमीन की आज की कीमत को देखते हुए चार गुना मुआवजा भी ज्यादा नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय विकास और बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए किसान समझौता कर बीच का रास्ता निकालने की बात कह रहे हैं। हम भी उनके साथ हैं। -देवेश रावत