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गलियों में डेयरी, चौराहों पर चौपायों की चौपाल, मत पूछो स्मार्ट सिटी का हाल

Sun, 24 Jun 2018 02:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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बनियापाड़ा में सड़क पर बैठीं गाय। - फोटो : अमर उजाला
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शहर की आबादी वाले इलाकों में चल रही डेयरियां लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी इनको शहर से बाहर करने को लेकर अभी तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई है। इन डेयरियों से उत्पादित होने वाला गोबर आदि अधिकांश नालियों में ही बहा दिया जाता है। जिससे नाली और नाले चोक हो जाते हैं। यही नहीं इनके चलते संबंधित क्षेत्र में संक्रामक रोगों का खतरा भी बना रहता है।
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एक अनुमान के मुताबिक शहर में करीब 200 छोटी बड़ी डेयरियां संचालित हो रही हैं। इनमें देहली गेट, सासनी गेट, बन्ना देवी, सिविल लाइन, क्वार्सी, गांधी पार्क इलाकों में ढपरा रोड, गंगा नगर, कनवरी गंज, हाथी पुल, पान वाली कोठी, गांधी नगर, किशनपुर, विक्रम कालोनी, विष्णुपुरी, स्वर्ण जयंती नगर, पला रोड, राम नगर आदि इलाके शामिल हैं। समय के साथ बढ़ रही समस्या यह है कि अब यह डेयरियां पूरी तरह आबादी वाले इलाकों में आ चुकी हैं। इनका गोबर आदि सब कुछ इकट्ठा कर बाहर ले जाने का दावा संचालकों द्वारा किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी बचने वाला मलवे को नाले नालियों में बहा दिया जाता है। जो कि नालों को चोक करता है।

मुद्दे का होता है राजनीतिकरण
डेयरियों का शहर से बाहर विस्थापन का मुद्दा जब भी उठा, उसका राजनीतिकरण हुआ। सपा की सरकार के समय जब हाईकोर्ट के आदेश आए। तब नगर निगम में सभी डेयरी संचालकों के साथ बैठक की गई। लेकिन उस समय स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के चलते मुद्दा दब गया। बाद में जब भाजपा सरकार आई, तब एक बार फिर से यह मुद्दा उठा। लेकिन इस बार सपा नेताओं ने मुद्दा उछाल दिया कि अधिकांश डेयरी संचालक एक समुदाय के हैं। इसलिए उनके खिलाफ उत्पीड़न की कार्यवाही की जा रही है। इसके बाद मुद्दा फिर दब गया।
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यह डेयरियां शहर से बाहर संचालित हों, इसके लिए निर्देश तो हैं, लेकिन मौजूदा हालात में जो कमेटी इस काम के लिए बनाई है। वही किसी निर्णय पर नहीं पहुंची है।  
डॉ. शिव कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

यहां डेयरी वालों ने नरक कर रखा है। यह लोग यहां पर एक नेता को दूध घर पहुंचा देते हैं, जिससे वह नेता इनके साथ खड़े हो जाते हैं। पूरे क्षेत्र की जनता बदबू और गोबर में सड़ने को मजबूर है।
- मो. असिफ, दोदपुर, बरगद हाउस, पान वाली कोठी

यहां मोहल्ले  में जो डेयरियां हैं, उससे  बदबू के   साथ-साथ संक्रामक रोग फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। कई बार नगर    निगम को शिकायत की है, लेकिन हमने तो कभी इनका चालान तक कटते नहीं देखा है।
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- प्रशांत अग्रवाल, विष्णुपुरी

 
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