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अलीगढ़ः दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या के दोषी को फांसी की सजा

Sun, 19 Dec 2021 12:15 AM IST
राजेश सिंह क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
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दुष्कर्म के बाद 10 साल की एक बच्ची की गला घोंटकर हत्या करने वाले दोषी को विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) ने फांसी की सजा सुनाई है। उसे अर्थदंड भी देना होगा। वह बच्ची को सोते समय घर से उठाकर ले गया था और उसके साथ दुष्कर्म किया था। बच्ची के चिल्लाने पर मुंह और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी और सबूत मिटाने के मकसद से शव को नहर में फेंक दिया था। 
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थाना हाथरस जंक्शन क्षेत्र के कस्बा मेंडू निवासी 10 साल की एक बच्ची अपने घर  के निकट अन्य परिजनों के साथ 22 अगस्त की रात्रि में सोई थी लेकिन सुबह परिजनों को वह नहीं मिली। अगले दिन 23 अगस्त को बच्ची का  शव सूजिया के पास नहर में मिला था। इस मामले में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने तीन दिन के अंदर घटना का खुलासा किया था।



पुलिस ने इस मामले में चंद्रपाल कुशवाहा पुत्र गंगाराम निवासी महमूदपुर थाना सिकंदराराऊ जिला हाथरस को गिरफ्तार किया था।  चंद्रपाल की बहन इस कस्बे में रहती है और वह रक्षाबंधन के दिन बहन के यहां आया था। रात्रि में शराब के नशे में चंद्रपाल सोते समय इस बच्ची को उसके घर से उठाकर ले गया था। दुष्कर्म के दौरान बच्ची के चिल्लाने पर आरोपी ने मुंह और गला दबाकर बच्ची की हत्या कर दी थी और सबूत
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मिटाने के उद्देश्य  से शव को नहर में फेंक दिया था। इस मामले में विवेचनाधिकारी तत्कालीन  कोतवाली प्रभारी हाथरस जंक्शन राजीव यादव और तदुपरांत वर्तमान कोतवाली प्रभारी रितिक कुमार ने विवेचना की थी। इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पोक्सो अधिनियम) प्रतिभा सक्सेना के न्यायालय में हुई।



दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। उसे फांसी और एक लाख 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी राजपाल सिंह दिसवार ने पैरवी की। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्त चंद्रपाल को फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाए। अर्थदंड अदा  करने पर जमा धनराशि में से आधी धनराशि मृतका के संरक्षक को नियमानुसार पहचान सुनिश्चित कर दी जाए। 

सिर्फ 18 कार्यदिवस में हुआ फैसला
घटना के केवल साढ़े तीन माह में ही हत्यारे को कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी। पुलिस ने आरोपी को घटना के 72 घंटे के अंदर ही गिरफ्तार कर फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्रित  करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। एडीजीसी राजपाल सिंह दिसवार के अनुसार केवल 18 कार्यदिवस में ही इस मामले में कोर्ट ने सजा सुनाई है।
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