क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सर सैयद हॉल नार्थ (एसएस नार्थ) के वार्डन डॉ. वसीम पर हुए जानलेवा हमले की घटना को कैंपस के लोग भूले भी नहीं थे कि सैफ खां को गोली मार दी गई। बार-बार हिंसक घटनाएं सामने आने से कैंपस में पढ़ने-लिखने वाले छात्र दहशत में हैं।
7 मार्च को एएमयू के 65वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एवं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक शामिल हुए थे। उसके अगले ही दिन एसएस नार्थ में हिंसक घटना हो गई।
गोलियों की गूंज से छात्र दहशत में हैं। करीब दो महीने पहले इसी हॉल के वार्डन डॉ. वसीम पर एसएस नार्थ हॉल के समीप जानलेवा हमला हुआ था। काफी दिनों तक डॉ. वसीम गुड़गांव के एक बड़े अस्पताल में जिंदगी एवं मौत से संघर्ष करते रहे। लाखों खर्च एवं परेशानी के बाद उनकी जान बच पाई।
उस घटना को कैंपस के छात्र एवं शिक्षक भूले भी नहीं थे कि नई घटना सामने आ गई। एक बार फिर लोग कैंपस में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कैसे युवक हाथ में तमंचा लहराते हुए आते हैं और फायरिंग करते हैं। तमंचा आता कहां से है। इसमें छात्र होते हैं या बाहरी युवकों की भूमिका होती है।
उल्लेखनीय है कि चंद महीने पहले अलीगढ़ के एसएसपी राजेश पांडेय ने एएमयू के हॉस्टल में बाहरी अपराधियों द्वारा शरण लिए जाने का खुलासा किया था। उसके बाद हॉस्टल में सर्च अभियान भी चला था। एसएस नार्थ की घटना के बाद एक बार फिर कैंपस की हकीकत सबके सामने है।