ऋषि, विजेंद्र कपूर व घी फैक्टरी संचालक गौतम से अलग-अलग हुई पूछताछ में साफ हुआ है कि कपूर को अल्कोहल व डीएनएसपी स्प्रिट का एक ड्रम बरेली से 10 हजार रुपये में मिलता था। वह इस माल को शराब सिंडिकेट को 30 हजार रुपये प्रति ड्रम के हिसाब से बेचता था। इस तरह उसे एक ड्रम पर सीधे 20 हजार का मुनाफा होता था। वहीं नकली घी की आड़ में शराब बनाने वाले गौतम के जरिये जब शराब सिंडिकेट कपूर के संपर्क में आया तो इसमें डील हुई कि 5 हजार रुपये प्रति ड्रम का कमीशन गौतम को मिलेगा। इसके बाद यह माल गौतम के जरिये ही कपूर इस सिंडिकेट को देने लगा।
ऋषि देता था इनामी मदन को सप्लाई
ऋषि से पूछताछ में यह साफ हुआ है मडराक से 25 हजार के इनामी फरीदाबाद निवासी मदन गोपाल को वह नकली शराब की सप्लाई देता था। मदन यहां से माल ले जाकर कहां बेचता था, इसकी जानकारी वही दे सकता है।
बुलंदशहर से था ऋषि व गौतम का रिश्ता
ऋषि ने शराब व्यापार की शुरुआत अपने बहनोई के पास बुलंदशहर से की है। इसलिए उसके गौतम से पुराने रिश्ते थे। इन्हीं रिश्तों की आड़ में ऋषि की मदद से ही गौतम ने यहां पैर जमाए थे। बाद में गौतम ही कपूर व शराब सिंडिकेट का मध्यस्थ बना।
कपूर के पास सॉल्वेंट बनाने का लाइसेंस
कपूर की फैक्टरी से जब्त दस्तावेजों की जांच में पाया गया है कि उसके पास सॉल्वेंट बनाने का लाइसेंस है। इसी आड़ में वह तमाम तरह के केमिकल खरीदता था और यहां शराब तस्करों को बेचने लगा था।