मतदान के पहले की रात जहां नेता अपने लिए कत्ल की रात मानते हैं तो वहीं मतगणना के पहले की रात मानों यही रात अंतिम, यही रात भारी। बस एक रात की कहानी है सारी...यही रात अंतिम यही रात भारी की तरह है। यह हालत किसी एक प्रत्याशी की नहीं है। कमोबेश जिले में सातों विधानसभा में चुनाव मैदान में उतरे सभी प्रत्याशियों की यही हालत हैं।
सिर्फ एक क्लिक पर जानें हर विधानसभा सीट का नतीजा
खासकर प्रमुख पार्टियों से चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की चुनावी परिणाम को लेकर हालत बेहद पतली है। परिणाम को लेकर उनकी चिंताएं कहीं अधिक है। मतदान के बाद से ही वे आंकड़ेबाजी करने में जुटे हुए हैं। हालांकि सभी प्रत्याशी तमाम दावे करते हुए अपनी-अपनी जीत के लिए आश्वस्त हैं। उधर, चुनाव के शंखनाद से लेकर अब तक आरोप- प्रत्यारोप का दौर चलता रहा हैं। कई नेता तो असंवेदनशीलता की सारी हदें लांघते रहे। एग्जिट पोल को लेकर भी जमकर अनर्गल बयानबाजी हो रही है। नेताओं के तमाम दावों और प्रति दावों का फैसला मतगणना के बाद होगा। यह मतगणना कई प्रत्याशियों के भविष्य को भी तय करने वाली है।