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कोरोनावायरस: यूनानी चिकित्सा के आगे कोरोना का वार बेअसर, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवाएं मौजूद

Sat, 07 Mar 2020 12:36 PM IST
Trainee Trainee दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

  • एएमयू तिब्बिया कॉलेज के प्रो. नईम अहमद खान ने किया दावा 
  • जैसे-जैसे मौसम में गर्माहट बढ़ेगी, वैसे-वैसे वायरस खत्म हो जाएगा  
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यूनानी चिकित्सा - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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कोरोनावायरस के कहर से दुनिया कराह रही है लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यूनानी चिकित्सा के आगे कोरोना वायरस का वार बेअसर है। ऐसा दावा किया है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अजमल खान तिब्बिया कालेज के इल्मुल अदविया विभाग के प्रमुख प्रो. नईम अहमद खान ने। उनका कहना है कि यूनानी चिकित्सा में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की शानदार और असरकारक दवाएं मौजूद है कि जिनका इस्तेमाल करने के बाद कारोना का वार इंसान पर पूरी तरह बेकार साबित होता है।

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प्रो. नईम अहमद खान का कहना है कि कोरोना वायरस मुख्यत: सर्दी, जुकाम, बुखार से शुरू होकर जब रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है तो शरीर पर हावी होने लगता है। साफ सफाई न होने और हाइजीन का ख्याल नहीं रखने से हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। लेकिन यूनानी चिकित्सा में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त दवाएं हैं। 

डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा लें
प्रो. नईम ने बताया कि यहां पर नाम इसलिए नहीं दे रहे हैं कि लोग खुद से दवा लेने लगते हैं। जबकि ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा लेनी चाहिए। डॉ. नईम कहते हैं कि कोरोना के मामले में एक बात जान लेना जरूरी है कि यह संपर्क में आने के बाद ही प्रसारित होगा। हवा में संक्रमित नहीं होगा। सामान्य बुखार, जुकाम, खांसी आदि से कोरोना के लक्षण अलग हैं। इसमें सांस लेने में तकलीफ होना और कड़ा बुखार मुख्य हैं।
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टेसू के फूल होली में होते हैं मुफीद
डॉ. नईम अहमद खान कहते हैं कि पहले होली में टेसू के फूलों का इस्तेमाल होता था। टेसू के फूलों में प्राकृतिक रूप से वह तत्व मौजूद होता है, जो मार्च के मौसम में कई प्रकार के संक्रमण और फंगस आदि से बचाव करता है। लेकिन आजकल केमिकल के रंगों से होली होती है। इससे भी पिछले कई दशकों में काफी फर्क पड़ा है। मार्च का महीना ही संक्रमण के लिए मुफीद होता है। जैसे-जैसे मौसम में गर्माहट बढ़ेगी, वैसे-वैसे वायरस खत्म हो जाएगा।  

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