वित्तीय संकट में फंसे यस बैंक पर रिजर्व बैंक द्वारा लगाई गई मौद्रिक सीमा का असर शुक्रवार को नजर आया। मात्र 50 हजार रुपये निकालने की तय सीमा के बाद ग्राहक अपने बैंक खाते के भविष्य को लेकर चिंतित नजर आए और मैरिस रोड स्थित बैंक शाखा में उमड़ पड़े। पैसा निकालने की इस कदर होड़ मची कि दोपहर दो बजे तक बैंक का कैश खत्म हो गया।
इससे घबराए ग्राहक बैंक अफसर एवं कर्मचारियों से सवाल जवाब करते देखे गये। इधर बैंक प्रबंधन भी ग्राहकों के तीखे सवालों और बैंक के भविष्य के मामले में गोलमोल जवाब देकर टालता नजर आया। इस दौरान बैंक में पूरे दिन जबरदस्त भीड़ रही।
एनपीए में बढ़ोत्तरी एवं शेयर में गिरावट के चलते मौद्रिक संकट में फंसी यस बैंक पर रिजर्व बैंक ने मौद्रिक सीमा लगा दी है। इसके बाद खाताधारक अब बैंक से 50 हजार रुपये से ज्यादा की रकम नहीं निकाल सकेंगे। निकासी की यह सीमा तीन अप्रैल 2020 तक लागू रहेगी। बैंक में एक महीने के लिए एसबीआई के पूर्व डीएमडी एवं सीएफओ प्रशांत कुमार की प्रशासक के रूप में नियुक्ति कर दी गई है।
रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद ग्राहकों में घबराहट है। इसका असर शुक्रवार को मैरिस रोड स्थित बैंक शाखा में साफ नजर आया। बैंक खुलते ही परिसर में पैसा निकालने वालों की भीड़ जमा हो गई। हर कोई अपना पैसा निकालने को व्याकुल नजर आया। प्रबंधक नाविद खान ने बताया कि पूरे दिन बैंक में पैसा निकलवाने वाले ही आए। इस वजह से कैश खत्म हो गया है।
करेंसी चेस्ट में भी पैसा न होने के कारण इधर-उधर से कैश की जुगाड़ करने की कोशिश की जा रही है। ज्यादा जानकारी देने से प्रबंधन ने मना किया है। इसके लिए कॉरपोरेट कम्युनिकेशन से संपर्क करना होगा।
महेंद्र नगर निवासी बुजुर्ग किसान गिरीश ने बैंक में घुसते ही प्रबंधक से सवाल किया कि साहब मेरी बैंक में चार एफडी हैं। वे तो सुरक्षित रहेंगी। या फिर मुझे अपनी जिंदगी भर की पूंजी से हाथ धोना पड़ेगा।
एशियन ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस के प्रबंधक एहसान ने पूछा कि साहब संस्थान के कर्मचारियों का सैलरी एकाउंट बैंक में ही है। उनकी तनख्वाह कैसे निकलेगी। जब 50 हजार की लिमिट है तो पैसा कैसे निकलेगा।