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अलीगढ़ः कोरोना महामारी ने खींचा आध्यात्म की ओर, बन गए बाल व्यास

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ब्रज किशोर महाराज। - फोटो : CITY OFFICE
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एक ओर कोरोना महामारी ने देश के हालात बिगाड़ दिए। लोग अपने घरों में कैद होकर परेशान होने लगे थे। आलम यह था कि घर में कैद लोगों को मानसिक बीमारी होने लगीं, जबकि इसी महामारी के दौरान मूल रूप से हस्तपुर के चंद्रफरी गांव निवासी नौ वर्षीय वंश शर्मा व सात साल की वंशिका शर्मा का ध्यान आध्यात्म की ओर आकर्षित हुआ। भाई-बहन की जोड़ी वृृंदावन साधु-संतों की सेवा में चली गई। वहां भागवत कथा के साथ संगीत की विद्या को आत्मसात किया।
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संतों के आशीर्वाद से दोनों भाई-बहन अब बाल व्यास बन गए हैं। 9 साल की उम्र में वंश शर्मा ब्रज किशोर महाराज व सात साल की उम्र में वंशिका शर्मा वृंदा किशोरी महाराज बन गई हैं। दोनों का कहना है कि अब आध्यात्म के ग्रंथों के अलावा पढ़ाई में मन नहीं लगता। जीवन भर भगवान की कथा करते रहेंगे।
इगलास तहसील के चंद्रफरी गांव निवासी सोनू शर्मा कर्मकांडी ब्राह्मण हैं। वर्ष 2020 में कोरोना की दस्तक आई तो सोनू शर्मा ने बच्चों को घर से निकलने से मना कर दिया। उनका मन लगाने के लिए सोनू शर्मा भागवत कथा सुनाया करते थे। धीरे-धीरे यह कथाएं दोनों के मन में इतना असर छोड़ गईं कि बच्चों को पढ़ाई अच्छी नहीं लगने लगी। सोनू शर्मा ने पढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों कथा सुनने पर अड़े रहते।
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इसके बाद सोनू शर्मा दोनों बच्चों को वृंदावन लेकर गए। वहां ब्रज धाम कालोनी में अपना आवास बनाया। इसके बाद शिवानंद आश्रम में आदर्श कृष्ण शास्त्री से श्रीमद्भागवत कथा का नियमित अनुसरण बच्चो को करवाया। वहां दोनों कथा के साथ संगीत की विद्या लेने लगे। विभिन्न मंदिरों के सत्संग, भजन-कीर्तन में भाग लेने लगे। दो साल में दोनों निपुण होकर बाल व्यास बन गए हैं।
वंश ने बताया कि मथुरा रोड पर चामड़ वाली माता मंदिर के पीछे घर था। यहां उनके पिता ने कोरोना से बचने के लिए घर पर रखने के दौरान हाथों में मोबाइल पकड़ाया और कथा सुनाई। कथा सुनकर भगवान का भजन, कीर्तन करते रहने का मन करने लगा। वंशिका ने बताया कि वह घर पर नियमित मंदिर में पूजा सेवा करती थीं। भगवान की सेवा करना अच्छा लगता है, इसीलिए उनकी कथा भी पसंद है। वंश ने स्कूल में आखिरी पढ़ाई कक्षा छह में जबकि वंशिका ने कक्षा तीन की पढ़ाई की है। इसके बाद स्कूल नहीं गई। इसके बाद से वह श्रीमद्भागवत कथा समेत धार्मिक ग्रंथों को आत्मसात कर रहे हैं। ब्रज किशोर महाराज अपनी पहली कथा एमपी के रीवा में कर चुके हैं। चंद्रफरी गांव में चार दिसंबर से वह अपनी दूसरी कथा करेंगे, जबकि वृंदा किशोरी की यह पहली कथा है।
चार से कथा, मृतकों की आत्मा की शांति के लिए होगा यज्ञ
चंद्रफरी गांव में बाल व्यास ब्रज किशोर महाराज व वृंदा किशोरी चार दिसंबर से लेकर 10 दिसंबर तक कथा करेंगे। आयोजक पप्पू शर्मा ने बताया कि बाबा बर्फानी भक्त मंडल के संरक्षक सुरेंद्र शर्मा के आह्वान पर कथा में कोरोना काल के मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रतिदिन गायत्री पितृ यज्ञ का आयोजन होगा। इसमें कोरोना से दिवंगत लोगों की आत्मा की मुक्ति के लिए आहुतियां दी जाएंगी। सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि कोरोना की त्रासदी में तमाम लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है। पीपीई किट में लिपटे शवों को लोग मुुखाग्नि तक नहीं दे सकते थे, इसीलिए जो भी व्यक्ति अपने प्रियजनों की आत्मा की शांति के लिए आहुति देना चाहते हैं वह अपने प्रियजनों की मुक्ति के लिए नाम, पिता का नाम और गोत्र समेत पूरी जानकारी 9368840458 पर व्हाट्स एप कर सकते हैं। यह सेवा निशुल्क रहेगी।

वृंदा किशोरी महाराज।- फोटो : CITY OFFICE

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