कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
इसे कुदरत का करिश्मा कहें या कठिन परिश्रम का प्रतिफल। मलिन बस्तियों में कोरोना वायरस का असर कम पड़ जाता है। शहर की मलिन बस्तियों में 1900 लोगों की कोरोना जांच कराई गई। मात्र 2 लोग संक्रमित पाए गए। दिलचस्प आंकड़ा देखकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्वयं हैरान हैं। सही कारण किसी की समझ में नहीं आ रहा है। कुछ चिकित्सक तो इसे शोध का विषय मान रहे हैं।
चंद रोज पहले नगर निगम के रैन बसेरे एवं आश्रय स्थल में 34 लोगों की कोरोना वायरस की जांच कराई गई। शासन के निर्देश पर यह जांच हुई थी, इसलिए अधिकारी से लेकर कर्मचारियों तक की नजर थी। सभी की रिपोर्ट ऋणात्मक थी। इससे पूर्व नवंबर-दिसंबर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा पला साहिबाबाद, नगला तिकोना, जीवनगढ़, जमालपुर, शाहजमाल, इंदिरानगर, पुष्प विहार, बेगमबाग, मौलाना आजाद नगर, भुजपुरा, बन्नादेवी, केके जैन, नौरंगाबाद एवं रघुवीरपुरी स्थित मलिन बस्तियों में 1900 लोगों की कोरोना जांच कराई गई थी। मात्र 2 लोग संक्रमित पाए गए थे। दोनों संक्रमित व्यक्ति केलानगर के थे।
इस दिलचस्प रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। लोग समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका क्या कारण हो सकता है। मलिन बस्तियों में कुपोषण एवं बीमारी आम बात है। जागरूकता का भी सबसे अधिक अभाव यहीं है। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी का कहना है कि हो सकता है कि मलिन बस्तियों में लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक हो। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मेहरोत्रा का कहना है कि मुंबई के धारावी का उदाहरण हमारे सामने है। धारावी दुनिया की बड़ी मलिन बस्तियों में शामिल है।
वह कहते हैं कि मलिन बस्तियों में कोरोना का कम केस होना दिलचस्प एवं शोध का विषय है। इस पर शोध हो तो मानव हित में कुछ नए तथ्य निकलकर सामने आ सकते हैं। हो सकता है कि मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक हो। या एंटी बॉडी विकसित कर लिए हों। इसके अतिरिक्त मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग कठिन शारीरिक परिश्रम करते हैं। यह भी महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। लॉकडाउन के दौरान जब देश के बड़े-बड़े शहरों से मजदूरों का पलायन हो रहा था तो लोग यही आशंका जता रहे थे कि पूरे देश एवं गांवों में कोरोना फैल जाएगा, लेकिन वैसा कुछ हुआ नहीं।