स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अचल सरोवर में हो रहे सौंदर्यीकरण के तहत अचल गुमटी के ऊपर स्थापित हो रही चार टन की शिव प्रतिमा के मुख की दिशा को लेकर दो पक्षों में विवाद की स्थिति बन गई है। बुधवार को एक पक्ष ने विरोध किया तो काम रुक गया है।
एक पक्ष से स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज, परशुराम सेवा संस्थान और कुछ पुजारियों का कहना है कि शिव प्रतिमा का मुख दक्षिण की तरफ है, जबकि मुख उत्तर की तरफ होना चाहिए। इस पक्ष का तर्क है कि सभी तरह की ऊर्जा कैलाश से उत्पन्न होती है और वहीं पर समाहित हो जाती हैं। दूसरे पक्ष से पं. हृदय रंजन शर्मा, कौशल किशोर महाराज, पार्षद प्रदीप आर्य सहित अन्य लोगों का कहना है कि भगवान सर्वत्र विराजमान हैं। सृष्टि के पालन-पोषण के साथ संहारकर्ता भगवान शंकर की दक्षिण में प्रतिमा होना अच्छा है।
बुधवार को वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज और अन्य समाजसेवी व धर्माचार्य अचल सरोवर पहुंचे और यहां गलत तरीके से स्थापना करने पर नाराजगी जताई। काम भी रुकवा दिया गया। यहां स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज ने प्रकरण को लेकर मंडलायुक्त गौरव दयाल से शिकायत की है। उन्होंने बताया कि किसी भी कीमत पर आस्था से खिलवाड़ सहन नहीं करेंगे। बुधवार से शनिवार तक काम रुका रहा तो अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची और मामले की पड़ताल की। ठेकेदार ने बताया कि हम कुछ नहीं कह सकते हैं। लेकिन यह बात सही है कि विवाद की वजह से काम बंद पड़ा है। भगवान परशुराम सेवा संस्थान ने शनिवार को मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपकर प्रतिमा की दिशा गलत बताई है। इसकी दिशा बदलने की मांग की गई। इनके अलावा, कई ज्ञापन मंडलायुक्त तक पहुंचाए गए हैं, जिनके माध्यम से शिव प्रतिमा की दिशा बदलने की मांग की गई है।
चार टन की शिव प्रतिमा हो चुकी है स्थापित
खास बात यह है कि विवाद तब हो रहा है, जब चार टन की शिव प्रतिमा गुमटी के ऊपर स्थापित हो चुकी है। इसका 90 प्रतिशत कार्य भी पूरा हो गया है। अगर अब प्रतिमा हटाई जाती है तो इसके क्षतिग्रस्त होने की भी संभावना है। यह प्रतिमा आयरन के बेस और फाइबर से तैयार की गई है। दूसरे पक्ष का कहना है कि प्रतिमा बिल्कुल सही जगह है। दक्षिणमुखी महाकालेश्वर की पूजा अकाल मृत्यु से बचने के लिए की जाती है। वह भी दक्षिण मुखी है।
1- भगवान की प्रतिमा उत्तर की तरफ होती है तो साधक को पूर्व मुख होना चाहिए। तेज के चलते सामने से कोई काम नहीं कर सकते हैं। कैलाश पर्वत पृथ्वी का केंद्रीय बिंदु है, जितनी ऊर्जा है, वह वहीं से उत्पन्न होती है और वहीं पर समाहित होती है। मृत्यु के देवता उत्तर की तरफ मुंह करके ही बैठते हैं। दूसरी तरफ रामलीला ग्राउंड जीटी रोड पर है। भगवान राम सरयू लीला के लिए अचल में प्रवेश करेंगे तो उन्हें पीठ दिखेगी, जो अनुचित है। धर्म की बात ही है, बाकी प्रशासन और समाज जाने।
- स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज
2- अचल ताल के सौंदर्यीकरण में भगवान शिव की जो मूर्ति दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ लग रही है, वह बिल्कुल सही है, क्योंकि भक्त का मुंह दक्षिण की तरफ नहीं होना चाहिए। भगवान का मुंह दक्षिण की तरफ हो सकता है। भगवान शिव स्वयं महाकाल हैं। दक्षिण दिशा राक्षसी दिशा कही जाती है। जब प्रभु का मुख दक्षिण दिशा की तरफ होगा तो शहरवासियों के दुख गरीबी और रोगों का नाश होगा। भारत के कई प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में प्रतिमाएं दक्षिणमुखी हैं। गिलहराज मंदिर में भी प्रतिमा दक्षिणमुखी है। लोग जानबूझकर बतंगड़ बना रहे हैं।
-पं. हृदय रंजन शर्मा, श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान
3- पूर्व दिशा की ओर वाली मुख को तत्व पुरुष और पश्चिम की ओर वाले मुख को सिद्धजोत कहते हैं। उत्तर दिशा की ओर देख रहा मुख वाम देव है तो दक्षिण दिशा वाले मुख को अघोर कहते हैं। आदि गुरु शंकराचार्य ने भी दक्षिण मुखी भगवान की आराधना की थी। भगवान शिव का यह रूप सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। उज्जैन के बाबा महाकालेश्वर भी दक्षिण मुखी हैं। दक्षिण मुखी शिव की पूजा महामृत्युंजय महाकाल के रूप में होती है, अघोरेश्वर भगवान शिव के रूप में भी। इसलिए प्रतिमा का मुख दक्षिण की तरफ होना चाहिए।
- महंत योगी कौशल नाथ, प्राचीन सिद्धपीठ गिलहराज मंदिर।
4- भगवान शिव की प्रतिमा की दिशा को लेकर जो विवाद है, यह फालतू का विवाद है। अचल सरोवर का वर्षों बाद सौंदर्यीकरण हो रहा है। इस कार्य के पूरा होने पर इसकी भव्यता का अंदाजा लगेगा। मैं आर्य समाज से हूं। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दिशा कौन सी है। लेकिन जो लोग विवाद कर रहे हैं, वह सही नहीं हैं। आस्था के नाम विवाद करना गलत है।
- प्रदीप आर्य, नामित पार्षद