एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक व्यक्ति की ड्रिलिंग मशीन से कटी कलाई को ऑपरेशन से जोड़ दिया गया। स्वस्थ होने के बाद उसे मेडिकल कॉलेज से छुट्टी दे गई।
अलीगढ़ के चंद्रेशखर, जमीन में ड्रिल कर रहे थे, तभी गलती से उनका हाथ मशीन के नीचे आ गया। इसमें उनकी कलाई कट गई। उन्हें जेएन मेडिकल कॉलेज लाया गया। डॉ. शेख सरफराज अली, जिन्होंने डॉ. गौतम चौधरी व डॉ. इंद्रजीत सहित अन्य सहयोगियों ने दुर्लभ ऑपरेशन को अंजाम दिया। ऑपरेशन में वास्तविक समस्या रक्त की आपूर्ति को कटे हुए हिस्से तक बनाए रखना था। ऑपरेशन से नसों को ठीक किया और प्रमुख नसों को दोबारा जोड़ा। उन्होंने कहा कि हाथ की संरचना और कार्य को पुन: प्राप्त करने के लिए रोगी के पूरे कंकाल ढांचे, धमनियों और तंत्रिकाओं ऑपरेशन किया गया। उन्हें अधिक यूनिट रक्त देना पड़ा।।
छह घंटे तक चला ऑपरेशन
प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अरशद हफीज खान ने बताया कि ट्रामा सेंटर पहुंचने से पहले जख्मी चंद्रशेखर का काफी खून बह चुका था। उन्हें तुरंत आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर में ले गए। छह घंटे की मैराथन सर्जरी में रक्त की आपूर्ति बहाल करने और कटी हुई कलाई के टेंडन, नसों और हड्डियों की मरम्मत से पहले उन्हें पहले रक्तऔर फ्लुइड्स की आपूर्ति के साथ जीवित रखने का प्रयास किया गया। वरिष्ठ प्लास्टिक और पुनर्निर्माण सर्जन प्रो. मोहम्मद यासीन ने कहा कि ऐसे मामलों में, अंग का उचित संरक्षण और रोगी को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना सफल प्रत्यारोपण की कुंजी है।
टेंडन की चोट ठीक होने में लगेगा समय
माइक्रोवैस्कुलर सर्जन प्रो. इमरान अहमद ने कहा कि प्रभावित हिस्से में सनसनी को ठीक होने में अधिक समय लगता है और टेंडन की चोटों को फ्रैक्चर की तुलना में अधिक समय की आवश्यकता होती है।
अंग प्रत्यारोपण कठिन ऑपरेशन
माइक्रोवैस्कुलर सर्जन डॉ. मोहम्मद फहद खुर्रम ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण एक मुश्किल ऑपरेशन है, लेकिन माइक्रो सर्जरी की प्रगति के साथ, रक्त की आपूर्ति बहाल करके और टेंडन, तंत्रिकाओं और हड्डियों की मरम्मत करके शरीर के पूरी तरह से कटे हुए अंगों को फिर से लगाना संभव हो रहा है। प्लास्टिक सर्जरी विभाग में नियमित रूप से बढ़ती सफलता दर के साथ जटिल माइक्रोसर्जिकल प्रक्रियाएं कर रहे हैं।