दिव्यांग जनों को उपकरण वितरण करने संबंधी फर्जीवाड़े के आरोप में फंसी पूर्व विदेश मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद और उनके ट्रस्ट के सचिव को यहां एडीजे-3 के न्यायालय से शनिवार को अंतरिम जमानत दे दी गई है। साथ ही जमानत पर अंतिम सुनवाई के लिए 16 अक्तूबर की तारीख नियत की है।
न्यायालय ने उन्हें इस शर्त के साथ जमानत दी है कि विवेचना में वह विवेचक का सहयोग करेंगे और बिना अदालत की अनुमति के देश छोड़कर नहीं जा सकेंगे। बता दें कि यहां क्वार्सी थाने में वर्ष 2017 में दर्ज इस फजीवाड़े के मुकदमे की विवेचना अभी ईओडब्ल्यू की लखनऊ शाखा कर रही है और दौरान-ए-विवेचना मुकदमे में इन दोनों के नाम बढ़ाकर आरोपी बनाया गया है।
प्रकरण के अनुसार 24 मई 2017 को आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा लखनऊ के निरीक्षक रमाशंकर यादव ने क्वार्सी थाने में धारा 420, 467, 468, 471, 120बी के तहत दर्ज कराया था, जिसमें कायमगंज की पूर्व विधायक व सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद की देखरेख में संचालित ट्रस्ट डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के प्रतिनिधि प्रत्यूष शुक्ला निवासी 4/528 मदर हाउस विवेक खंड गोमती नगर लखनऊ को नामजद आरोपी बनाया गया था।
मुकदमे में आरोप था कि वर्ष 2010 में भारत सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय से प्राप्त अनुदान 71.50 लाख रुपये से ट्रस्ट ने प्रदेश के अलीगढ़ सहित कई जिलों में कैंप लगाकर दिव्यांगजनों को उपकरण वितरित किए थे। इसी क्रम में यहां मैरिस रोड पर 30 मई 2010 को कैंप लगाना दर्शाया गया।
नियम के अनुसार कैंप के लाभार्थियों की संख्या के 10 प्रतिशत लोगों की चेक रिपोर्ट किसी प्रशासनिक अधिकारी व सीएमओ के हस्ताक्षर से केंद्रीय मंत्रालय को देनी थी, जिसमें अलीगढ़ के कैंप से जुड़े 24 लाभार्थियों की चेक रिपोर्ट वहां भेजी गई। जिस पर अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय व सीएमओ अलीगढ़ के फर्जी हस्ताक्षर आरोपी प्रत्यूष शुक्ला द्वारा किए गए थे।
जांच में रिपोर्ट फर्जी पाए जाने पर गड़बड़ी उजागर हुई और केंद्र सरकार के निर्देश पर मामले में ईओडब्ल्यू से जांच कराई गई। इसी जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज कराते हुए विवेचना ईओडब्ल्यू शाखा लखनऊ को सौंप दी गई। इसी मामले में दौरान-ए-विवेचना ट्रस्ट की परियोजना निदेशक/कोषाध्यक्ष लुईस खुर्शीद निवासी 4 गुलमोहर एवेन्यू जामिया नगर नई दिल्ली व सचिव अतहर फारुकी उर्फ मोहम्मद अतहर निवासी 80 सुखदेव विहार न्यू फ्रेंडस कालोनी नई दिल्ली के नाम बतौर आरोपी बढ़ाए गए।
इसी के चलते दोनों की ओर से जमानत के लिए अधिवक्ता के जरिये सत्र न्यायालय में अर्जी दायर की गई। जिसकी सुनवाई एडीजे-3 के न्यायालय में नियत हुई। इस जमानत अर्जी पर विरोध में बहस के लिए अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने विवेचना जारी होने और केस डायरी उपलब्ध न होने का हवाला देकर समय मांगा।
इस पर न्यायालय ने सशर्त अंतरिम जमानत देते हुए जमानत पर निस्तारण के लिए 16 अक्तूबर तारीख नियत की है। अदालत का आदेश है कि विवेचक गिरफ्तार करने की दशा में 50-50 हजार रुपये के निजी बंधपत्र पर जमानत देंगे। पुलिस द्वारा तलब किए जाने पर दोनों उपस्थित होंगे और विवेचना में सहयोग करेंगे, मुकदमे से संबंधित किसी व्यक्ति को धमकाएंगे नहीं और अदालत की बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएंगे।
चूंकि लुईस खुर्शीद पूर्व विधायक हैं, इसलिए उन्होंने पहले जमानत याचिका जनप्रतिनिधि कोर्ट इलाहाबाद में दायर की थी, मगर वहां से यह इस तर्क के साथ वापस कर दी गई कि वहां पूर्व जनप्रतिनिधियों के मामलों की सुनवाई नहीं होगी।
वह संबंधी जनपद न्यायालय में ही जाएं। इस पर लुईस खुर्शीद व उनके ट्रस्ट के सचिव के अधिवक्ता ने यहां जमानत अर्जी दायर की, जिस पर हमने बहस के लिए समय मांगा और अदालत ने सशर्त अंतरिम जमानत जारी करते हुए तारीख नियत कर दी है।
-जेपी राजपूत एडीजीसी/अभियोजन अधिवक्ता