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आदर्श गांव बहरावद का सच: केक काटवै की कह गऔ, आज तक लौट कै ना आओ तुम्हारौ सांसद, चुनाव आन देऔ तब बताएंगे

Sat, 09 May 2026 03:45 PM IST
Chaman Kumar Sharma नितिन गुप्ता, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

पूर्व सीएम कल्याण सिंह के पैतृक गांव मढ़ौली के पास बहरावद एक आदर्श गांव है। अलीगढ़ सांसद सतीश गौतम के लिए ग्रामीणों का नजरिया ही अलग है।  ग्रामीण डोरी लाल ने कहा, ''कोई बच्चा गौद ले लैए तो वाकउ ख्याल बड़े ध्यान से रखै है। हमें तो जै ना पतौ कि वाकी गोद में हैं, वाने गोद से उतार दिओ।
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बहरावद में जर्जर पानी की टंकी, उसकी खराब मशीन - फोटो : संवाद
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विस्तार
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11 साल पहले कैक काटवै की कहके गऔ, तब से लौट कै ना आओ तुम्हारौ सांसद। शादी-ब्याह में वाके खूब चक्कर लगै, मगर यों नाए कि एक बार हमारी परेशानी झांक कै देख लै। यह बात बहरावद निवासी डोरी लाल ने अपने गांव में किए गए विकास कार्यों के पूछने पर कही। खैर तहसील के बसेरा-भदियार की तरह अतरौली तहसील के इस बहरावद गांव में भी लोग नाराज दिखे।

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पूर्व सीएम कल्याण सिंह के पैतृक मढ़ौली से करीब इस गांव के ऊपरी इलाके में पानी की परेशानी है। सड़कें-गलियां जर्जर हैं, नालियां टूटी पड़ी हैं, हर ओर गंदगी फैली है। गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप है। शौचालय की व्यवस्था नहीं है। बिजली कटौती से लोग परेशान हैं। ग्रामीण डोरी लाल ने कहा, ''कोई बच्चा गौद ले लैए तो वाकउ ख्याल बड़े ध्यान से रखै है। हमें तो जै ना पतौ कि वाकी गोद में हैं, वाने गोद से उतार दिओ। भईया रै, झहां कोई व्यवस्था नाएं, तू खामखा क्यौ दिमाग मार रहौ है।''

यहां भी संवाददाता को डोरीलाल का गुस्सा बसेरा-भदियार के भूपेंद्र सिंह जैसा महसूस हुआ। गांव का दूसरा हिस्सा देखने के लिए वह आगे बढ़ गया। इस बीच सामने से आतीं कैलाशी देवी ने हाथ में कैमरा देखा तो वे तपाक से बोल पड़ीं, ''तुम झहां खाली फौटो खींचवै ही आतौ, कछु करवाओ गेउ। एक सांसद ने जै गांव गोद लिओ, वे बहोत काम करवा गए झहां पै। जै देख लैओ, मेरे घर के अगार कैसौ पानी ठहरौ है। कीचड़ देख लेऔ। रिश्तेदार जब आवै तो मौंह पे हंसके चले जावैं। तुम्हारी कसम, हमें तो बहोत शर्म आवै, वाय ना आवत।''

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बहरावद में खंडहर पड़ा सामुदायिक शौचालय, सड़क पर कीचड़ - फोटो : संवाद
दरअसल 2014 में सतीश गौतम जब पहली बार बहरावद में वोट मांगने गए तब वहां लोगों ने खुलकर इनका समर्थन किया। ग्रामीणों के मुताबिक, जीत के बाद पहला स्वागत भी इसी गांव में हुआ। उस भव्य आयोजन देख सांसद भावुक भी हुए। जब आदर्श गांव योजना शुरू हुई तो सांसद सतीश गौतम ने बहरावद को ही अपना पहला गांव चुना। यहां एक कार्यक्रम में जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों के साथ सांसद पहुंचे और उन्होंने हर साल आठ अक्तूबर को गांव में केक काटकर बर्थडे मनाने की घोषणा कर डाली। बर्थडे में हर बार शामिल रहने का वादा तक किया, लेकिन डोरी लाल का कहना है कि केक काटने का वो दिन फिर आया नहीं।

चुनाव आन देऔ, तब बताएंगै
''चुनाव आन देऔ, तब बताएंगै, भईया रै। जै मोदी-योगी न होएं तो जा जैसन को वोट ना दे। पक्के मकान की कै के गऔ, देख लेऔ, कैसो पक्को मकान है जाकै गांव में।'' यह कहते हुए बहरावद निवासी रामप्रकाश ने कहा, ''गाम के लौगन ने ज्यादा स्वागत कर दिऔ, जा म्हारै वाए लगै कि झहां तौ सब वाके हैं। काम सही करे होते तो गाम वाकौ है जातो। काऊ सरकारी योजना को हमे लाभ न मिलौ। हम अखबार में ही पढ़ लेते हैं कि योजना लागू हुई है।''
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बहरावद में बंद पड़ा नलकूप - फोटो : संवाद
दरअसल 2014 में सतीश गौतम जब पहली बार बहरावद में वोट मांगने गए तब वहां लोगों ने खुलकर इनका समर्थन किया। ग्रामीणों के मुताबिक, जीत के बाद पहला स्वागत भी इसी गांव में हुआ। उस भव्य आयोजन देख सांसद भावुक भी हुए। जब आदर्श गांव योजना शुरू हुई तो सांसद सतीश गौतम ने बहरावद को ही अपना पहला गांव चुना। यहां एक कार्यक्रम में जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों के साथ सांसद पहुंचे और उन्होंने हर साल आठ अक्तूबर को गांव में केक काटकर बर्थडे मनाने की घोषणा कर डाली। बर्थडे में हर बार शामिल रहने का वादा तक किया, लेकिन डोरी लाल का कहना है कि केक काटने का वो दिन फिर आया नहीं।

चुनाव आन देऔ, तब बताएंगै
''चुनाव आन देऔ, तब बताएंगै, भईया रै। जै मोदी-योगी न होएं तो जा जैसन को वोट ना दे। पक्के मकान की कै के गऔ, देख लेऔ, कैसो पक्को मकान है जाकै गांव में।'' यह कहते हुए बहरावद निवासी रामप्रकाश ने कहा, ''गाम के लौगन ने ज्यादा स्वागत कर दिऔ, जा म्हारै वाए लगै कि झहां तौ सब वाके हैं। काम सही करे होते तो गाम वाकौ है जातो। काऊ सरकारी योजना को हमे लाभ न मिलौ। हम अखबार में ही पढ़ लेते हैं कि योजना लागू हुई है।''
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