आईएमईआई ट्रैकिंग से आसान हुई जांच
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच में तकनीक से काफी मदद मिली है। उन्होंने बताया कि आईएमईआई ट्रैकिंग के जरिए काफी काम आसान हुआ है। सिम कार्ड बदलने के बावजूद मोबाइल हैंडसेट की पहचान इसी यूनिक नंबर से हो रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि एक ही फोन में कितनी बार सिम बदली गई और वह किन-किन क्षेत्रों में सक्रिय रहा। इससे नेटवर्क के विस्तार और आपसी कनेक्शन की पुष्टि हो सकेगी।
चेसिस नंबर बताएगी असली मालिक
जांच के दौरान बरामद स्विफ्ट कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगी पाई गई है। अब पुलिस चेसिस नंबर के जरिए वाहन के वास्तविक मालिक का पता लगाने में जुटी है, जिससे गिरोह के अन्य कनेक्शन सामने आने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक की गहराई से जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर डंप डेटा का भी विश्लेषण किया जाएगा, जिससे किसी विशेष स्थान पर सक्रिय संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान की जा सके।