फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ ः बिना स्पीड गवर्नर के दौड़ रहे व्यावसायिक वाहन

विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रीय राजमार्गों व अन्य मार्गों पर होने वाले सड़क हादसों का प्रमुख कारण अधिक गति होना होता है। इसके मद्देनजर भारत सरकार ने एक अप्रैल 2014 को सभी व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर (एसएलडी - स्पीड लिमिटिंग डिवाइस) लगाने आदेश जारी किया था। इसके तहत सभी व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर लगवाना अनिवार्य था। लेकिन हकीकत में सात साल चार महीने गुजरने के बावजूद जनपद के सभी व्यावसायिक वाहनों पर स्पीड गवर्नर नहीं लगे हैं। इसका खुलासा तब हो रहा है, जब ये वाहन फिटनेस के लिए पहुंच रहे हैं। एक जुलाई 2021 से 19 अगस्त 2021 तक कुल 551 वाहनों ने एसएलडी लगवाकर फिटनेस करवाई है।
विज्ञापन

सभी व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर अनिवार्य रूप से लगाने के लिए भारत सरकार ने एक अप्रैल 2014 को केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के नियम 118 को संशोधित कर नया नियम लागू किया गया है। इस नियम के अनुसार सभी वाहन स्वामियों को वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड गवर्नर लगवाना था। स्पीड गवर्नर लगने से व्यावसायिक वाहनों की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित हो जाती है। अगर चालक 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अधिक अपने वाहन को चलाना चाहें तो भी वाहन की रफ्तार नहीं बढ़ती है। लेकिन सात साल बाद भी जिले के सभी व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं लगे हैं। इसका खुलासा आरटीओ कार्यालय में वाहनों के फिटनेस के दौरान होता है।
विगत एक-दो वर्षों से शोरूम से निकलने वाले नए व्यावसायिक वाहनों में कंपनी खुद स्पीड गवर्नर लगाकर दे रही है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में 25 हजार से अधिक व्यावसायिक वाहन दौड़ रहे हैं। एक जनवरी 2017 से अब तक 5752 वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए गए हैं, जबकि एक जुलाई से 19 अगस्त तक कुल 551 वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए गए हैं। आरटीओ दफ्तर स्पीड गवर्नर के प्रमाणपत्र के आधार पर ही पुराने वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया को पूरा करता है।
विज्ञापन

स्पीड गवर्नर लगाने में होता है खेल
नियम के मुताबिक स्पीड गवर्नर लगाने के लिए ट्रेड जारी किए जाते हैं। ट्रेड लेने वाली कंपनियां गैराज स्थापित कर स्पीड गवर्नर को लगाती हैं। जिले में कितने गैराज में स्पीड गवर्नर लगाने का कार्य होता है। इसकी जानकारी परिवहन विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है। बताया गया कि कंपनी के स्पीड गवर्नर की कीमत करीब एक हजार रुपये है। लेकिन वाहन स्वामियों से इससे अधिक रकम वसूली जाती है। इस संबंध में स्पीड गवर्नर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारी से बात की गई तो वह कीमत और गैराज को लेकर टालमटोल करता रहा।
व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर अनिवार्य रूप से लगा होना चाहिए। फिटनेस के लिए आने वाले वाहनों में इसे चेक करते हैं। बिना स्पीड गवर्नर प्रमाणपत्र के फिटनेस जारी नहीं की जाती है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन है।
विज्ञापन

रंजीत सिंह, एआरटीओ प्रशासन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें