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अलीगढ़ः इंसानी हकों की हिफाजत करने वाले थे हजरत इमाम हुसैन

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एएमयू स्थित वैतुल सलात में मातम करते मुस्लिम सामुदाय के लोग । अमर उजाला - फोटो : CITY OFFICE
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दस मोहर्रम आशूरा के मौके पर शुक्रवार को अलग-अलग स्थानों पर हजरत इमाम हुसैन की शहादत के गम में मजलिस कर मातम किया गया। शाहजमाल स्थित कर्बला में सीमित संख्या में लोगों ने पहुंचकर जियारत की। कर्बला में जो ताजिए रखे हुए थे, वह गम के माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किए गए। अजादारों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें इंसानी हकों की हिफाजत करने वाला बताया।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बैतुल सलात में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना शबाब हैदर ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत से पहले दुश्मन का पता नहीं चलता था और दुश्मन पर्दे में छुपा रहता था। इमाम हुसैन ने यजीद को कर्बला के मैदान में बेनकाब कर दिया। यजीद इस्लाम का लिबास पहनकर हर वह बुरा काम करता था, जो इस्लाम धर्म ही नहीं बल्कि इंसानियत भी उसको स्वीकार नहीं करती। इमाम हुसैन ने रहती दुनिया तक यह दिखा दिया कि हक पर कौन है और बातिल कौन है? इमाम हुसैन कर्बला में अपने साथ नन्हे नन्हे बच्चे और औरतों को लेकर आए। यजीद ने उन पर भी जुल्म की इंतहा कर दी और तीन दिन भूख और प्यास से तड़पाने के बाद शहीद कर दिया।
इसके अलावा, केला नगर पर इमामबाड़ा हुसैनिया जेहरा में मौलाना नवेद काजमी ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म जान लेना नहीं, बल्कि इंसानियत की हिफाजत करना सिखाता है।
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जोहरा बाग स्थित हुसैनी मस्जिद में मौलाना जाहिद रामपुरी ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने कहा कि हमने 10 दिन जो अजादारी की है, उससे हमें पूरे साल के लिए यह शिक्षा मिलती है कि हम अपने पड़ोसी का ख्याल रखें। चाहे वह किसी भी धर्म का हो।
इसके अलावा इमामबाड़ा अलीनगर, धौर्रा स्थित नाजिम साहब का इमामबाड़ा, तार बंगला स्थित इकबाल साहब का इमामबाड़ा, इमामबाड़ा रियासत अली फूल चौराहा, इमामबाड़ा टनटन पाड़ा, इमामबाड़ा सैयदबाड़ा में भी मजलिस हुई। यहां पर भी ताजिए और अलम रखे गए। यहां पर सीमित संख्या में लोग आकर जियारत करते रहे।
पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका रही सहयोग पूर्ण : मुख्तार जैदी
अलीगढ़। शाहजमाल स्थित कर्बला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी ने बताया कि 10 दिन और शुक्रवार को आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाने में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की सहयोग पूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि खास तौर से आईजी दीपक कुमार, डीएम सेल्वा कुमारी जे., एसएसपी कलानिधि नैथानी, महापौर मोहम्मद फुरकान, नगर आयुक्त गौरांग राठी, एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुनावत, एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपानी, सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार, क्षेत्राधिकारी कोतवाली राघवेंद्र सिंह, क्षेत्राधिकारी सिविल लाइन श्वेताभ पांडे सहित अन्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हैं।
जुलूस या सामूहिक आयोजन नहीं, सीमित संख्या में जियारत की
अलीगढ़। शुक्रवार को 10 मोहर्रम के दिन कोई जुलूस या सामूहिक आयोजन नहीं किया गया। व्यक्तिगत रूप से लोगों ने कर्बला पहुंच कर जियारत की। कोरोना महामारी के चलते मोहर्रम के आयोजन को लेकर शासन और प्रशासन ने कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। सभी प्रकार के आयोजन इन दिशा-निर्देश के मुताबिक ही किए गए। इसके लिए मुतवल्ली कर्बला मुख्तार जैदी और आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों ने पहले ही व्यवस्था कर ली थी और संबंधित लोगों को निर्देश दे दिए थे कि वह इसी व्यवस्था के मुताबिक काम करें।
आयोजन में ये रहे मौजूद
अंजुमन तंजीमुल आजा के उपाध्यक्ष ताबिश नकवी, मुर्तजा जैदी, अरशद जैदी, मौलाना गुलाम रजा, नाजिम हुसैन, महासचिव नादिर नकवी, कोषाध्यक्ष इनायत अली, प्रोफेसर परवेज कमर रिजवी, डॉक्टर हुसैन आमिर, डॉक्टर अब्बास, संयुक्त सचिव जुल्फिकार हुसैन आदि।

शाहजमाल करबला में ताजिया निकालते लोग। संवाद- फोटो : CITY OFFICE

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