सूबे का निजाम बदल गया। तेजतर्रार नेताओं में शुमार भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाल ली, लेकिन स्वास्थ्य अफसरों को इससे क्या, उन्हें तो बस मनमानी करनी है। इसकी एक झलक रविवार के अवकाश वाले दिन सीएमओ कार्यालय पर चस्पा हुई सूची में दिखाई दी।
मुख्यमंत्री की रोक के बावजूद राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में वर्ष 2016 से चल रही एपिडेमियोलाजिस्ट समेत सात पदों के सफल अभ्यर्थियों की सूची अवकाश वाले दिन न केवल जारी की गई, बल्कि उसे सीएमओ कार्यालय पर चस्पा भी कर दिया गया।
विचारणीय प्रश्न यह है कि मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना कर किन परिस्थितियों में ऐसा किया गया और इसके पीछे अफसरों की मंशा क्या है। जो भी हो, लेकिन यह सूची मुख्यमंत्री के आदेशों का माखौल उड़ा रही है। एनआरएचएम योजना में मुख्यमंत्री के रोक के आदेश के बावजूद चयनित अभ्यर्थियों की सूची चस्पा होने के मामले में जब सीएमओ एमएल अग्रवाल का वर्जन लेने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठा।
यह है मामला ःएनआरएचएम में विभिन्न पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया वर्ष 2016 से चल रही थी। इसके लिए आवेदन से लेकर साक्षात्कार तक की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी थी। लेकिन सूबे की सत्ता संभालते ही नवागत् मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एनआरएचएम में पूर्व में हुए घोटालों एवं ढेरों शिकायतों के मददेनजर किसी भी नई नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। लेकिन स्वास्थ्य अफसरों ने मुख्यमंत्री के आदेशों को धता बता दी।
एपिडेमियोलाजिस्ट के सामान्य श्रेणी के एक पद, स्टाफ नर्स के सामान्य व ओबीसी के एक-एक पद, डिस्ट्रिक्ट कंसल्टेंट के सामान्य श्रेणी का एक पद, काउंसलर के एससी एवं ओबीसी श्रेणी के एक-एक पद, साइकोलाजिस्ट का सामान्य श्रेणी का एक पद, सोशल वर्कर का सामान्य श्रेणी का एक पद तथा लैब टेकिभनशियन का ओबीसी एवं सामान्य श्रेणी का एक-एक पद।
एनआरएचएम में सफल अभ्यर्थियों की सूची चस्पा होने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की कार्यप्रणाली पर तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसके खिलाफ सोशल संगठन उठ खड़े हुए हैं। सबसे ज्यादा अंगुलियां रविवार को चस्पा की गई सूची को लेकर है।