एएमयू संस्थापक सर सैयद अहमद खां मुंबई, दिल्ली एवं कोलकाता की तर्ज पर अलीगढ़ को बड़ा आर्थिक एवं व्यापारिक केंद्र के रूप में देखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने ज्वाइंट स्टॉक कंपनी की स्थापना की और शेयर भी निकाले। उस समय के बड़े-बड़े राजा एवं नवाबों ने शेयर खरीदे, लेकिन एक खजांची के गबन के कारण सर सैयद का यह सपना साकार न हो सका।
सर सैयद की 200वीं जयंती पर सर सैयद एवं अलीगढ़ आंदोलन को नए ढंग से परिभाषित करने वाले एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि सर सैयद द्वारा संपादित इंस्टीट्यूट गजट 21 फरवरी 1891 के अंक में अलीगढ़ में ज्वाइंट स्टाक कंपनी के बारे में लिखा गया है कि सर सैयद ने 10 हजार रुपये की पूंजी से 50-50 रुपये के दो सौ शेयर निकाले थे, ताकि अलीगढ़ की बनी चीजों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सके और यहां के वाशिदों की आर्थिक दशा को सुधारा जा सके।
कंपनी में मुरसान के राजा कुंवर धनश्याम सिंह ने 50-50 रुपये के 20 शेयर लेने की स्वीकृति प्रदान की थी। भीकमपुर के नवाब मुजम्मिल उल्लाह खां ने 5 शेयर खरीदने थे, जबकि पुरदिलनगर के साहूकार लाला मटरुमल ने 4 शेयर खरीदे थे। इंस्टीट्यूट गजट के 1891 के अंक में जिन शेयर होल्डरों के नाम मिलते हैं।
उनमें लाखनूं के मान सिंह, पिसावा के रईस ठाकुर गोविंद सिंह, इगलास के रईस गंगाराम, ठाकुर खेरत सिंह, लाखनूं के कुंवर कुंदन सिंह, अलीगढ़ के डिप्टी कलेक्टर पंडित कामता प्रसाद आदि शामिल हैं। डॉ. राहत अबरार के मुताबिक एमएओ कॉलेज के खजांची श्याम विहारी लाल माथुर द्वारा जुलाई 1895 में एक लाख पांच हजार के गबन के कारण सर सैयद का यह सपना साकार नहीं हो सका।