रेलवे स्टेशन पर घर से नाराज होकर या भटक कर आने वाले बच्चों को सामाजिक संस्था चाइल्ड लाइन सही राह दिखाने का काम कर रही है। इसमें संस्था आरपीएफ व जीआरपी की मदद ले रही है। इतना ही नहीं संस्था जिले भर से लापता बच्चों को खोजने व उनके परिजनों तक पहुंचाने का काम कर रही है। हर माह संस्था स्टेशन पर भटकते हुए मिलने वाले 15-20 बच्चों को खोजकर उन्हें घर की राह दिखा रही है। पिछले छह माह में ही करीब 150 से अधिक बच्चों को उनके घर भेजा जा चुका है।
कंट्रोल रूम बन रहा सहायक
रेलवे स्टेशन पर बना सीसीटीवी कैमरा कंट्रोल रूम भटके हुए या घर से भाग कर आने वाले बच्चों को खोजने में खासा सहायक बन रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे स्टेशन पर करीब 26 कैमरे लगे हुए हैं। जिनकी मदद से आरपीएफ व चाइल्ड लाइन की टीम लापता बच्चों, नाराज होकर स्टेशन पहुंचने वाले बच्चों को खोजने का काम कर रही है। स्टेशन पर बने सीसीटीवी कंट्रोल रूम के पास ही चाइल्ड लाइन का दफ्तर व हेल्प डेस्क बनी हुई है। जहां हर वक्त किसी न किसी वालंटियर की तैनाती रहती है। जिनका काम स्टेशन पर भटकते हुए मिलने वाले बच्चों को अपनी सुपुर्दगी में लेकर उनकी देखरेख रखना और उन्हें घर तक पहुंचाने अथवा परिजनों को सूचना देकर स्टेशन पर बुलाना है।
सुरक्षा एप से लापता बच्चों को खोजने में मिल रही मदद
शहर से लापता होने वाले बच्चों के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए एक सुरक्षा एप तैयार किया गया है। इसकी मदद से माता-पिता से बिछुड़े हुए बच्चों के नाम, पते, फोटो के अलावा उनसे जुड़ी हुई पूरी जानकारी को दूसरे शहरों में पुलिस से साझा किया जा सकता है। एप की मदद से दूसरे शहरों में पहुंचे बच्चों व शहर में मिलने वाले बच्चों को उनके शहर व घर तक पहुंचाया जा रहा है।
150 से अधिक बच्चों को परिजनों से मिलवाया
चाइल्ड लाइन संस्था लापता बच्चों को खोजने के अलावा स्टेशन पर रूठकर आने वाले बच्चों को तलाश करती है, फिर उन्हें परिजनों तक सकुशल पहुंचाने का काम कर रही है। इसमें आरपीएफ व जीआरपी संस्था की भरपूर मदद कर रही है। अब तक संस्था 150 से अधिक बच्चों की हमदर्द बनकर उन्हें परिजनों से मिलवा चुकी है।
- चरन सिंह तोमर, पोस्ट कमांडर, आरपीएफ
काउंसलिंग के बाद बच्चों को भेजते हैं घर
स्टेशन या शहर भर में भटकते हुए बच्चों को खोजकर उनकी काउंसलिंग कराई जाती है। बाल कल्याण समिति के समक्ष पेशी कराकर उनके घर तक पहुंचाया गया है। जिले भर में भी लावारिस मिलने वाले बच्चों को पुलिस की मदद से उनके घर तक भिजवाया गया है।
- डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा, निदेशक चाइल्ड लाइन संस्था