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कॉफी का स्वाद बढ़ा रही चिकोरी: 3500 लगाकर 28 हजार रुपये में बिकती है एक बीघा की फसल, लगातार बढ़ रहे प्लांट

Sat, 18 Nov 2023 06:31 PM IST
चमन शर्मा आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

चिकोरी कॉफी का स्वाद बढ़ाने के साथ कई तरह की मिठाइयों में भी प्रयोग होती है। इसमें चॉकलेट फ्लेवर की बर्फी प्रमुख है। चॉकलेट आइसक्रीम, चॉकलेट टॉफी, चॉकलेट बिस्किट भी इसका प्रयोग होता है। कई तरह की दवाओं और सिरप के फ्लेवर में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसलिए लगातार इसकी मांग बढ़ रही है।
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विस्तार
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कॉफी का स्वाद बढ़ाने वाली चिकोरी की फसल का दायरा और इसके प्लांट अलीगढ़ में तेजी से बढ़ रहे हैं। शुरुआती वर्षों में अलीगढ़ में इसके केवल दो प्लांट थे, अब इनकी संख्या 18 तक पहुंच गई है। चिकोरी कॉफी का स्वाद बढ़ाने के साथ कई तरह की मिठाइयों में भी प्रयोग होती है। इसमें चॉकलेट फ्लेवर की बर्फी प्रमुख है। चॉकलेट आइसक्रीम, चॉकलेट टॉफी, चॉकलेट बिस्किट भी इसका प्रयोग होता है। कई तरह की दवाओं और सिरप के फ्लेवर में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसलिए लगातार इसकी मांग बढ़ रही है।

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रबी की फसल के इस मौसम में इसकी खेती आलू और गेहूं की तुलना में अधिक सस्ती और बहुत कम जोखिम भरी है। इसकी फसल का भाव पहले से तय होता है, इसलिए किसान इसकी ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। जिले में लगभग 3500 बीघा में इसकी फसल हो रही है। साल दर साल ये रकबा बढ़ रहा है। किसानों को एक नियमित लाभ देने वाली इस फसल और इसके प्लांट की पूरी जानकारी सरकारी विभागों में उपलब्ध नहीं है। कृषि विभाग, जिला उद्यान अधिकारी, जिला उद्योग केंद्र और खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी इसकी थोड़ी बहुत सतही जानकारी ही रखते हैं। ऐसे में किसानों को इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है।

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विटामिन से है भरपूर
चिकोरी के पौधे का वनस्पतिक नाम चिकोरियम एंटीबस है। इसमें विषाक्तता मुक्त करने के लक्षण होते हैं। ये वजन कम करने, किडनी की पथरी के उपचार के लिए भी लाभदायक है। इसमें जिंक, मैग्नीशियम, कैल्शियम, लौह फोलिक, पोटेशियम, विटामिन ए, बी-6, सी, ई और के होता है।

चिकोरी की खेती तेजी से बढ़ रही

  • 7000 रुपये प्रति किलो की दर से थाइलैंड से आता है बीज
  • मई-जून में बीज की बुकिंग होती है, अक्तूबर में मिलता है
  • थाईलैंड की केवल एक ही कंपनी इस बीज को बेचती है
  • 80 ग्राम बीज प्रति एक बीघा खेती में डाला जाता है
  • 3500 रुपये तक एक बीघा खेती की लागत आती है
  • साढ़े पांच महीने में चिकोरी की फसल तैयार होती है
  • नवंबर में फसल की बुवाई और मार्च में होती है कटाई
  • फसल बेचने का भाव पहले से किसान से तय होता है
  • 700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से फसल बिकती है
  • 40 क्विंटल तक प्रति बीघा की दर से पैदावार होती है
  • 28,000 रुपये प्रति बीघा की दर से इसकी जड़ बिकती है
  • 45 से 50 हेक्टेयर में अलीगढ़ में इसकी खेती हो रही

चिकोरी के प्लांट
  • 18 प्लांट अलीगढ़ में संचालित, दो प्लांट से हुई थी शुरुआत
  • 40 लाख रुपये तक एक प्लांट की लागत आती है
  • 03 बीघा में एक प्लांट आरामदायक तरीके से संचालित होता है
  • 10 साल में अलीगढ़ में 2 से 18 प्लांट लगाए गए हैं
  • 85 प्लांट एटा में लग चुके हैं, 15 हजार हेक्टेयर में खेती
  • 2022-23 में एटा की चिकोरी को जीआई का टैग मिला
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कुछ साल पहले छर्रा में दो प्लांट से शुरुआत हुई थी, अब जिले में 18 चिकोरी प्लांट हैं। अब हिंदुस्तान लिवर लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों के प्लांट भी लग चुके हैं। अलग अलग उद्यमी भी दो से चार प्लांट लग रहे हैं। -जयप्रकाश गुप्ता, चिकोरी प्लांट संचालक
हर साल इसका उत्पादन बढ़ रहा है। लोग इसकी खेती में कम जोखिम के साथ एक तयशुदा मुनाफा ले रहे हैं। इसकी मांग देश के साथ विदेश में भी हो रही है। जिससे रकबा हर साल बढ़ रहा है। -अंशू अग्रवाल, चिकोरी प्लांट संचालक
इगलास के बिसनपुर गांव में एक चिकोरी प्लांट है, जो विभाग में पंजीकृत किया गया है। -सर्वेश मिश्रा, सहायक खाद्य आुयक्त
अलीगढ़ में कुल कितने प्लांट हैं ये स्पष्ट नहीं है। एटा में लगभग 85 प्लांट संचालित हैं। -वीरेंद्र, संयुक्त उपायुक्त उद्योग
अलीगढ़ में इसकी खेती का रकबा बढ़ रहा है, छर्रा और इगलास में इसकी पैदावार हो रही है। -अमित जायसवाल, जिला कृषि अधिकारी
यकीनन चिकोरी की फसल का रकबा बढ़ रहा है। अभी इसका पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं है। -डॉ.धीरेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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