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छर्रा विधानसभा सीट : विरोध-मुद्दे हैं हावी...जातीय गणित में फंसी जीत की चाभी

Sat, 05 Feb 2022 12:54 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़

सार

सबके अपने-अपने जातीय आंकड़े हैं। सेंधमारी का सबका अपना-अपना प्रयास है। मतदाता भी सभी की ओर नजरें गढ़ाए देख रहा है। निर्णय एन वक्त पर ही होगा। कहीं नाराजगी का आलम चरम पर है तो जातीय गणित इस नाराजगी के आड़े आ रहा है।
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लक्ष्मी धनगर। छर्रा प्रत्याशी सपा - फोटो : CITY OFFICE
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विस्तार
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कल्याण सिंह के प्रभुत्व वाली छर्रा सीट पर लड़ाई अर्से से भाजपा-सपा के बीच चली आ रही है। इस बार भी माहौल कुछ ऐसा ही बनता दिख रहा है। मगर चेहरे के आधार पर बसपा को भी कमजोर नहीं कहा जा सकता। कुल मिलाकर विरोध-मुद्दों की बिसात के बीच जातीय गणित में इस सीट पर जीत की चाभी फंसी हुई है।

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अब उस गणित की मदद से कौन उस चाभी को निकाल पाएगा? इस प्रयास में सभी जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। सबके अपने-अपने जातीय आंकड़े हैं। सेंधमारी का सबका अपना-अपना प्रयास है। मतदाता भी सभी की ओर नजरें गढ़ाए देख रहा है। निर्णय एन वक्त पर ही होगा। कहीं नाराजगी का आलम चरम पर है तो जातीय गणित इस नाराजगी के आड़े आ रहा है। कुल मिलाकर इस सीट पर जीत की बिसात बेहद तगड़ी बिछी हुई है।

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ये है सियासी दलों की अपनी रणनीति

भाजपा ने इस सीट पर लगातार दूसरी बार मौजूदा विधायक रवेंद्रपाल सिंह को मौका दिया है। हालांकि वे अपने कराए गए कार्यों और सरकार की योजनाओं के सहारे प्रचार में जुटे हैं। उनको अपनी जाति के साथ-साथ भाजपा के परंपरागत वोटों पर पूरा भरोसा है। जहां नाराजगी है, वहां वे अपने स्तर से व संगठन के अन्य लोगों की मदद से मनाने का प्रयास कर रहे हैं। सपा खेमे में टिकट कटने की नाराजगी का भी वे लाभ ले रहे हैं।

सपा ने इस बार टिकट बदलकर महिला प्रत्याशी लक्ष्मी धनगर को मौका दिया है। वे अपनी जाति के अलावा यादव, मुस्लिम और भाजपा के नाराज वोटों के सहारे मैदान में हैं। बसपा ने इस बार तिलकराज यादव को मैदान में उतारा है। लंबे समय से इस सीट पर बसपा दूसरे और तीसरे नंबर पर रहती आई है। परंपरागत वोट के साथ-साथ तिलकराज अपने गृह क्षेत्र, अपनी जाति व अन्य दलों के वोटों में सेंधमारी का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस ने भी इसी क्षेत्र के कस्बा अकराबाद के अखिलेश शर्मा पर दांव खेला है। वे और उनकी पार्टी क्या चमत्कार दिखाएगी, ये आने वाला समय बताएगा।

ज्यादातर इलाकों में वोटर चुप्पी साधे हैं

कस्बा छर्रा के व्यापारी प्रेमप्रकाश गुप्ता स्वीकारते हैं कि प्रत्याशी के प्रति नाराजगी है। मगर कहीं और जा भी नहीं सकते। वे कहते हैं कि सरकार की योजनाओं का प्रभाव देखने को मिल रहा है। व्यापारी ज्ञानेश माहेश्वरी विकास के मामले में पिछड़े इस क्षेत्र को और खादर को कुछ नहीं मिला है। ऐसे में इस सरकार या प्रत्याशी को क्षेत्र में इस बार ज्यादा बढ़त मिलने की उम्मीद नहीं है। सपा ने कम से कम सड़कों का जाल जरूर बिछवाया था। इसी तरह श्याम बाबू गुप्ता अभी इंतजार की बात कर रहे हैं। सीट का इलाका एटा चुंगी से शुरू होकर गंगीरी तक पहुंचता है। शहर से सटे इलाकों में मूल भूत सुविधाओं को लेकर लोगों में खासी नाराजगी है।

2022 के रण में ये प्रत्याशी


- रवेंद्रपाल सिंह-भाजपा, अखिलेश शर्मा- कांग्रेस, लक्ष्मी धनगर-सपा, तिलकराज यादव-बसपा।
--2022 के चुनाव में मतदाता--
- कुल मतदाता -386791
- पुरुष मतदाता -206187
- महिला मतदाता -180580
--2017 के चुनाव के नतीजे--
- रवेंद्रपाल सिंह (भाजपा) को मिले मत -110738
- राकेश सिंह (सपा) को मिले मत - 54604
- मो. सगीर (बसपा) को मिले मत - 53859
- अनुमानित जातीय मतदाता -
- 80 हजार ठाकुर, 50 हजार बघेल, 50 हजार मुस्लिम, 45 हजार लोधी, 40 हजार जाटव, 35 हजार यादव, 35 हजार वैश्य-ब्राह्मण, 15 हजार कुशवाहा, 15 हजार जाट, 10 हजार बंजारा, बाकी अन्य मतदाता।
अखिलेश कुमार शर्मा । छर्रा प्रत्याशी कांग्रेस- फोटो : CITY OFFICE
 
तिलकराज यादव । छर्रा प्रत्याशी बसपा- फोटो : CITY OFFICE
 
रवेन्द्र पाल सिंह। छर्रा प्रत्याशी भाजपा- फोटो : CITY OFFICE
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