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गांधी पार्क से सारसौल चौराहे तक नासूर बना जाम

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सारसौल जीटी रोड पर जाम में फसे वाहन। - फोटो : CITY OFFICE
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रोजाना गांधी पार्क बस स्टैंड से सारसौल चौराहे तक लोग जाम से परेशान रहते हैं। यहां रात में करीब 12 मिनट में तय होने वाला सफर दिन में 50 मिनट से एक घंटे से भी ज्यादा समय में तय होता है। करीब चार किलोमीटर लंबाई वाले इस रूट पर पांच ट्रैफिक लाइट हैं लेकिन ये भी जाम से निजात नहीं दिला पा रहंी हैं।
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इस सफर में सबसे पहली लाइट गांधी पार्क स्टैंड पर है। इसके बाद माल गोदाम चौराहा, रसलगंज, तहसील कोल चौराहा, सूतमिल सहित पांच सिग्नल हैं। इन पांचों सिग्नलों को क्रॉस करने में ही करीब आधा घंटे का समय लगता है। जाम मिलने पर समय और बढ़ जाता है। गांधी पार्क चौराहे से सारसौल की तरफ बढ़ते ही बेतरतीब ई: रिक्शा चालक फिर बस स्टैंड के बाहर खड़ी होने वाली रोडवेज बसें जाम का मुख्य कारण हैं।
दूसरे जिलों से आने वाली बसें बस स्टैंड के अंदर प्रवेश नहीं करती है। वह बाहर ही खड़े होकर सवारियों को चढ़ाती व उतारती हैं, जबकि नियम के अनुसार बस स्टैंड से सौ मीटर की दूरी तक कोई भी रोडवेज बस खड़ी नहीं हो सकती है। रही कसर दोनों तरफ चांट पकौड़ी, कचौड़ी, छोले भठूरे, फल आदि की दुकानें पूरी कर रहीं हैं। आसपास बने होटल तथा रेस्टोरेंट संचालकों ने भी बाहर अपनी प्रचार सामग्री लगाकर अतिक्रमण कर रखा है।
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दूसरी ट्रैफिक लाइट माल गोदाम पर है। यहां अनाधिकृत रूप से ठेल ढकेल वालों का कब्जा है। इस चौराहे पर चार जगहों से आने वाला यातायात टकराता है। जिस पर किसी का कोई काबू नहीं है। माल गोदाम पर शाहकमाल रोड, गांधी पार्क, रेलवे रोड व कठपुला से आने वाला ट्रैफिक आपस में एक दूसरे को मुंह दिखाता है। यहां से आगे चलें तो रसलगंज ट्रैफिक लाइट तक दोनों ओर ठेल ढकेल वालों का अतिक्रमण है। रसलगंज चौराहे पर पांच जगहों से आने वाला जाम टकराता है। एसपी सिटी कार्यालय के बाहर लगी लाइट जब तक हरी होती है, तब तक कठपुला की ओर जाने वाले वाहन चालक फिर से लाइट की जद में आ जाते हैं। इससे आगे बढ़ने पर कोल तहसील चौराहे पर ट्रैफिक लाइट है। तहसील के बाहर चाट - पकौड़ी वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। तहसील से लेकर सूतमिल चौराहे तक सड़क के दोनों ओर कुछ इसी तरह का नजारा है। सूत मिल चौराहे से पहले आरटीओ दफ्तर, प्राइवेट अस्पताल, ढ़ाबे, मैरिज हाल आदि हैं। जिनके पास अपनी कोई पार्किंग व्यवस्था नहीं हैं। आरटीओ दफ्तर के बाहर बैठे दलाल व साइबर कैफे वाले भी अपने ग्राहकों के वाहन सड़क पर ही लगवा देते हैं। कई बार पुलिस ने अभियान चलाकर हटाया लेकिन थोड़ी देर पर फिर से अतिक्रमण हो गया।
चार किमी के टुकड़े में जगह-जगह गड्ढे
जाम की एक वजह है सड़क का असंतुलन व अत्यधिक गड्ढे होना। गांधी पार्क बस स्टैंड से सारसौल चौराहे तक पांच किमी की सड़क पर करीब 65 गड्ढे हैं। लोगों का कहना है कि इन गड्ढों की वजह से वाहन की गति धीमी हो जाती है। कई जगहों पर सडक़ ऊंची नीची है। जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है।
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-गांधी पार्क से लेकर सारसौल चौराहे तक सड़क पर अत्यधिक गड्ढे हैं। जिनके चलते वाहन चलाने में परेशानी होती है। ई रिक्शा, टैंपो चालक बेतरतीब तरीके से कही भी अपना वाहन रोक देते हैं। जिससे जाम लगता है।
अरुण कुमार सिंह
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ट्रैफिक लाइट की समय प्रणाली को ठीक किया जाना चाहिए। इनका टाइम मैनेजमेंट गलत है। रुकने का समय भी ज्यादा है और हरी बत्ती का समय कम है। रसलगंज चौराहे और सूतमिल पर ज्यादा समस्या है।
शरद बंसल
- गांधी पार्क चौराहे से सारसौल तक जाम की समस्या आम है। यहां सड़क के दोनों ओर ठेल ढकेल वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। जिसके कारण जाम लगता है। सड़क भी खराब है। स्मार्ट सिटी में जाम नहीं होना चाहिए।
राहुल गर्ग
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- मालगोदाम चौराहे पर रेलवे रोड तक आने वाले वाहन चालक चकरा जाते हैं। उन्हें पता नहीं रहता कि कब निकलना है। पूरी यातायात व्यवस्था ट्रैफिक लाइटों के हवाले हैं। पुलिस कर्मियों का सहयोग कम दिखता है।
रोहित वार्ष्णेय
-इस मार्ग पर अतिक्रमण के साथ-साथ सड़क में गड्ढे, अवैध रूप से चलने वाले ऑटो - टेंपो, टिर्री और बेतरतीब अवैध पार्किंग जाम की बड़ी समस्या है। इस दिशा में सबसे ज्यादा काम होने की जरूरत है। इसके अलावा कठपुला के पास से चलने वाले अवैध वाहन भी बंद होना जरूरी है।
-अरुण श्रीवास्तव, यातायात सलाहकार
जीटी रोड पर यातायात दुरुस्त करने के लिए पूरा फोकस है। बसों के व्यवस्थित संचालन के साथ-साथ नो एंट्री, वन वे आदि पर विचार चल रहा है। अतिक्रमण भी हटवाया जा रहा है। ऑटो, टेंपो व टिर्री को भी व्यवस्थित ढंग से चलाया जाएगा।
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-मुकेश चंद्र उत्तम, एसपी यातायात
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