पाकिस्तान से विस्थापित होकर अलीगढ़ आए 79 वर्षीय सुभाष चंद्र कालरा ने विभाजन का दर्द झेलकर संघर्षों के बीच खेल उपकरणों का कारोबार खड़ा किया था। हरिओम नगर अग्निकांड में शॉर्ट सर्किट से फैले जहरीले धुएं ने उनकी जिंदगी की आखिरी लड़ाई भी छीन ली।
हरिओम नगर में हुए अग्निकांड की कहानी जितनी भयावह है, उतनी ही मार्मिक भी। 79 वर्षीय खेल उपकरण कारोबारी सुभाषचंद्र कालरा लंबे समय से अस्थमा से पीड़ित थे। शॉर्ट सर्किट के बाद घर में फैले घने और जहरीले धुएं ने उनके फेफड़ों पर ऐसा असर डाला कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
हादसे के दौरान जान जोखिम में डालकर घर में घुसे स्थानीय युवक नरेंद्र कुमार नंदा ने बताया कि नीचे की मंजिल तक पहुंचने के लिए एक संकरा गलियारा था। धुएं को चीरते हुए जब वे कमरे तक पहुंचे तो देखा कि आग सीधे सुभाष चंद्र तक नहीं पहुंची थी, लेकिन पूरा कमरा धुएं से भर चुका था। वह डबल बेड और दरवाजे के बीच अचेत अवस्था में पड़े मिले।
नरेंद्र के अनुसार हालात देखकर लग रहा था कि उन्होंने बाहर निकलने का प्रयास किया था, लेकिन सांस की बीमारी के कारण धुएं का सामना नहीं कर सके और दरवाजे तक पहुंचने से पहले ही गिर पड़े। मुख्य अग्निशमन अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि सुभाष चंद्र को पहले से सांस संबंधी परेशानी थी, जिस पर धुएं ने घातक प्रभाव डाला।