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Aligarh Election Result : बरौली अब जयवीर की, अतरौली फिर संदीप की

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जीत के बाद राज पैलेस पहुंचे संदीप सिंह। - फोटो : CITY OFFICE
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अभिषेक शर्मा
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18वीं विधानसभा के चुनाव के दौरान प्रदेश की टॉप-हॉट सीटों में शुमार जिले की बरौली व अतरौली सीट पर सभी की नजर थी। हो भी क्यों न? अतरौली पर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कल्याण सिंह के पौत्र प्रदेश सरकार में मौजूदा मंत्री संदीप सिंह और बरौली पर बसपा शासन काल में कद्दावर मंत्री रहे जयवीर सिंह मैदान में थे। ये चर्चा-ए-आम था कि परिणाम इन दोनों का सियासी कद तय करेंगे। दोनों ने अपने कद का अहसास भी कराया है। बरौली में जहां तेरहवीं बार किसी ठाकुर के सिर ताज बंधा है और जिले की सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। अतरौली में दादा के बाद लगातार दूसरी जीत दर्ज करने का रिकार्ड जिले के सबसे युवा विधायक संदीप ने बनाया है।
बरौली के इतिहास पर गौर करें तो 2002 और 2007 में लगातार दो बार विधायक रह चुके ठा.जयवीर सिंह को 2012 व 17 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। जब उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली तो उन्हें पार्टी ने एमएलसी बनाया। इस चुनाव में वे पहले से तैयारी कर रहे थे। टिकट के लिए उनके सामने निवर्तमान विधायक भी दावेदार थे। मगर उनकी बीमारी के चलते पार्टी ने जयवीर सिंह को मौका दिया और उन्होंने जीतकर कईरिकार्ड अपने नाम बनाए हैं। इसी तरह मंत्री संदीप सिंह को पार्टी ने फिर मौका दिया और उन्होंने भी जीत कर कई रिकार्ड बनाए हैं। खास बात है कि संदीप ने लगातार दूसरी बार वीरेश को ही हराया है। इस सीट पर खुद मंत्री के साथ-साथ उनके एटा सांसद पिता राजवीर सिंह की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी। स्टार प्रचारक के रूप में वे जितना समय प्रदेश में दे रहे थे, उतना अतरौली पर भी दे रहे थे। अब भाजपा के सामने जिले से मंत्री पद के लिए दो दो दावेदार हो गए हैं। ऐसे में आने वाला समय यह तय करेगा कि किसका पड़ला भारी रहता है और अगर दोनों को मंत्रालय मिलता है तो कितना महत्व दोनों को मिल पाएगा।
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जयवीर, अनूप व संदीप शुरू से बनाए रहे बढ़त
इस चुनाव में बरौली से जयवीर सिंह, खैर से अनूप प्रधान, अतरौली से संदीप सिंह तीन ऐसे प्रत्याशी रहे जो पहले राउंड से बढ़त बनाए रहे और उनकी बढ़त आखिरी राउंड तक बरकरार रही। इसके विपरीत इगलास में शुरुआत में रालोद के वीरपाल दिवाकर ने बढ़त बनाई तो भाजपा के राजकुमार सहयोगी की सांसें अटकीं। मगर मध्य में आकर राजकुमार ने बढ़त बनाना शुरू किया फिर वे बढ़त बनाते चले गए। इसी तरह छर्रा में कई बार ऐसे दौर आए कि जब कभी भाजपा तो कभी सपा आगे रहती। मगर अंत समय में आते आते रवेंद्र ने बढ़त बनाई और जीत दर्ज की। कोल व शहर में जरूर हार जीत का दौर चला।
सपा-रालोद की मेहनत रंग लाई, परिणाम तक न पहुंच पाई
इस चुनाव में सबसे ज्यादा बुरी हार का सामना सपा-रालोद गठबंधन को करना पड़ा है। अगर खैर व बरौली सीट को छोड़ दें तो बाकी पांचों सीटों पर सपा-रालोद गठबंधन निकटतम प्रतिद्वंद्वी के रूप में हारी है। बता दें कि 2012 के चुनाव में जिले की अतरौली, छर्रा, शहर व कोल पर सपा का, बरौली, खैर व इगलास पर रालोद का कब्जा था। गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी इसी तरह हुआ था और गठबंधन को उम्मीद भी परिणाम कुछ इसी तरह आने की रही थी। इसी प्रयास में एक तरफ जहां रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने इगलास, खैर व बरौली में चुनाव प्रचार किया था। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोल में आकर जिले की सातों सीटों के लिए वोट मांगे थे। ध्रुवीकरण के दम पर सपा ने शहर व कोल पर पिछले परिणाम से काफी बेहतर प्रदर्शन किया, मगर जीत का स्वाद न चख सकी। इसी तरह छर्रा पर तो 55 हजार से सीधे 86 पर सपा पहुंची। बावजूद इसके जीत तक न पहुंच सकी। अतरौली में सपा के वोटों में 20 हजार के आसपा की वृद्धि भी जिता न सकी। इगलास में रालोद को दूसरे व खैर-बरौली में तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।
अज्जू को 60 हजार की बढ़त, पर जीत न सके
सपा में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने का ताज इस बार कोल से प्रत्याशी शाज उर्फ अज्जू इशहाक के नाम रहा है। उन्होंने मतगणना में तीसरे राउंड के बाद बढ़त बनाई और 29वें राउंड तक वे बढ़त बनाए रहे। उनकी इस बढ़त को देख एकबार तो भाजपाइयों के पसीने छूटे। पहले माना गया कि मुस्लिम आबादी वाले वोट खुले हैं। मगर जब हिंदू आबादी व कोल के देहात के वोटों में भी उन्हें वोट मिलते दिखे तो लगने लगा कि परिणाम कहीं उलट न जाएं। इसी का परिणाम रहा कि वे 2017 में 42851 से 60 हजार बढ़कर एक लाख पार पहुंचे। मगर जीत न सके। इसका उनके चेहरे व समर्थकों के चेहरे पर खूब मलाल दिखा। कई समर्थक तो मतगणनास्थल पर रो दिए।
प्रियंका की रैली न कर सकी कमाल, जिले में कांग्रेस 32 हजार पर सिमटी
जिले में सबसे दुर्दशा इस बार के चुनाव में कांग्रेस की देखने को मिली है। 2002 के बाद से जीत का स्वाद न चख पाने वाली कांग्रेस को इस बार प्रियंका गांधी के रोड शो और कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी विवेक बंसल की कोल सीट पर की गई जी तोड़ मेहनत से कुछ उम्मीद थी। मगर इस बार का कांग्रेस का परिणाम सबसे बुरा रहा है। विवेक बंसल जहां पिछली बार का भी आंकड़ा न छू सके और जिले की सातों सीटों पर कांग्रेस सिर्फ 32432 मत ही पाकर संतोष कर बैठी है।
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बसपा में दरका बेस वोट, इधर उधर बिखरा
बसपा अध्यक्ष मायावती की रैली में उमड़ी भीड़ को देखकर सियासी जानकारों ने माना था कि बसपा का बेस वोट ज्यों का त्यों है। मगर परिणाम इसके उलट आए हैं। कई सीटों पर बसपा का बेस वोट पिछले परिणामों की अपेक्षा दरका है। जिनमें कोल में 37 हजार से घटकर बसपा 22 हजार पर रुकी है। शहर में 25 से 18 हजार पर, छर्रा में 53 हजार से 37 हजार पर, बरौली में 86 हजार से 57 पर, अतरौली में 45 से 23 हजार पर आकर रुकी है। हां, खैर में जरूर चेहरे के दम पर इस बार 53 से 64 हजार पर बसपा पहुंची है। माना जा रहा है कि सभी सीटों पर बसपा का वोट कहीं भाजपा तो कहीं सपा के खाते में गया है।
--बरौली सीट--
- तीसरी बार जीत दर्ज करने वाले बरौली के तीसरे विधायक बने जयवीर
- इतने रिकार्ड मतों से अब तक इस सीट पर किसी ने नहीं दर्ज की जीत
- सुरेंद्र सिंह चौहान और दलवीर सिंह यहां से चार-चार बार चुनाव जीते
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-- अतरौली सीट--
- दादा के बाद लगातार जीत दर्ज करने का रिकार्ड संदीप ने किया अपने नाम
- जिले के सबसे युवा विधायक बनने का रिकार्ड भी लगातार दूसरी बार बना
- इस सीट पर अब तक कल्याण सिंह ही लगातार दूसरा चुनाव जीत सके थे
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धनीपुर मंडी में जीत के बाद लोगो का अभिवादन स्वीकार करते ठाकुर जयवीर सिंह। - फोटो : CITY OFFICE

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