उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव विपक्षी पार्टियों के फायदेमंद नहीं रहा। अलीगढ़ की सातों सीटों पर भाजपा ने सफलता अर्जित की है। बसपा, कांग्रेस, सपा, रालोद व आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। इन पार्टी के जिलाध्यक्षों का कहना है कि वह जनता के फैसले का सम्मान करते हैं। हार की वजह का आंकलन करेंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों के बीच विचार मंथन भी करेंगे।
जिलाध्यक्षों का बयान
सपा का मत प्रतिशत बढ़ा है, जो अच्छा रहा, लेकिन प्रत्याशियों का न जीतना दुखद है। कोल विधानसभा क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा मत मिले। मतदाताओं ने जो फैसला दिया, उसका सम्मान करते हैं। जनता के अधिकारों के लिए जमीन पर संघर्ष करेंगे।
-गिरीश यादव, जिलाध्यक्ष, सपा
अलीगढ़ की जनता का फैसला सर्वमान्य है। जहां-जहां भूल हुई है, उस पर पार्टी के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों के साथ विचार मंथन करेंगे। हारने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह हार गए हैं। जनता के बीच जाएंगे और तैयारी करके फिर चुनाव में आएंगे।
-चौधरी कालीचरन सिंह, जिलाध्यक्ष, रालोद
सत्ताधारी पार्टी के लोगों ने बसपा प्रत्याशियों की घेराबंदी कर दुष्प्रचार किया। दलित विरोधी व जातिवाद मानसिकता से ग्रस्त प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाया, जिसकी शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी। लोकसभा चुनाव में पार्टी और मजबूती से तैयारी करेगी।
- रतनदीप सिंह, जिलाध्यक्ष बसपा
उत्तर प्रदेश में यह पहला प्रयास था। जो अपेक्षा कर रहे थे, वह नहीं मिल पाया, लेकिन आगे हम कोशिश जारी रखेंगे, क्योंकि पंजाब में भी पहला प्रयास था, जहां प्रचंड बहुमत में आए हैं। उत्तर प्रदेश में पहला कदम रखा। सुनहरे भविष्य की तरफ आगे बढ़ेंगे। हम जनता के जनादेश का सम्मान करते हैं।
-सतीश चंद्र शर्मा, जिलाध्यक्ष आम आदमी पार्टी
जनादेश हमारे पक्ष में नहीं आया। विधानसभा का चुनाव न तो विकास के नाम पर लड़ा गया और न ही शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर। केवल यह चुनाव हिंदू-मुस्लिम के नाम पर लड़ा गया। भाजपा ने हिंदू मतदाताओं से पोलराइजेशन कराया। जनता के साथ धोखा हुआ है।
-संतोष सिंह एडवोकेट, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष सिंह।- फोटो : CITY OFFICE
सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव।- फोटो : CITY OFFICE