‘मारना है तो मुझे गोली मार दो, दलितों पर हमले बंद करो’। रविवार को हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यह बयान दिए जाने के बाद एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप का मामला एक बार फिर गरमा गया है। नरेंद्र मोदी के दलित प्रेम को विरोधी पार्टी के लोग जहां ढकोसला करार दे रहे हैं, वहीं भाजपा के लोग एएमयू में आरक्षण से वंचित दलित समाज को उनका हक दिलाने की बात कर रहे हैं।
जनवरी में तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी अलीगढ़ में टीकाराम गर्ल्स डिग्री कॉलेज में एक कार्यक्रम में शामिल हुई थी। उस समय हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला का मामला गरमाया था और केंद्र सरकार पर विरोधी पार्टी द्वारा तीखे हमले किए जा रहे थे।
स्वयं स्मृति ईरानी तो कुछ नहीं बोलीं, लेकिन उनके जाने के बाद एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया एवं अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम ने एएमयू में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ों को आरक्षण दिलाने की बात कह माहौल गरमा दिया था। एएमयू में दलितों एवं पिछड़ों को आरक्षण दिलाने से संबंधित बयान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी दिया था।
भाजपा के इस दलित प्रेम के जवाब में बसपा अध्यक्ष मायावती भी मैदान में कूद गई थी और फरवरी में एएमयू अकलियत किरदार की वकालत कर मुस्लिमों का दिल जीतने का प्रयास किया था। राजनीतिक के जानकार लोग उसी समय से यह बात कह रहे हैं कि विधानसभा चुनाव के पहले एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप का मामला गरमाएगा।
फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं और 16 अगस्त को सुनवाई होने वाली है। मौजूदा केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले के आलोक में एएमयू को अल्पसंख्यक स्वरूप मानने से इंकार कर दिया है और पूर्व यूपीए सरकार द्वारा कोर्ट में दी गई हलफनामा वापस लेकर अपनी मंशा खुले तौर पर जाहिर कर चुकी है। कुछ महीने पहले एएमयू में छात्र एक्शन कमेटी द्वारा एक कार्यक्रम में आए एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी ने एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप के मामले को मुस्लिम बनाम दलित रंग देने का जोरदार विरोध किया था।
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एएमयू राष्ट्रीय महत्व की संस्था है। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि यह अल्पसंख्यक संस्था नहीं है। अन्य विश्वविद्यालयों की तरह यहां भी अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग को आरक्षण दिलाने के लिए भाजपा कटिबद्ध है। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। हमलोग यहां न सिर्फ दाखिला बल्कि टीचिंग एवं नॉन टीचिंग कर्मचारियों की नियुक्ति में भी संविधान प्रदत्त अधिकार दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। पूर्व की यूपीए एवं कांग्रेस सरकार ने दलितों को उनका हक नहीं दिलाया।
- डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, समन्वयक एएमयू बचाओ मंच एवं वरिष्ठ भाजपा नेता
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2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाला है। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दलित प्रेम जग गया है और वे घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। एएमयू में आरक्षण दिलाने के नाम पर वह बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वे दलितों का सच्चे हितैषी हैं तो गुजरात में दलितों को नंगा करके बेरहमी से पिटने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करते। आरएसएस के साथ मिलकर मोदी दलितों को पाषाण युग में धकेलना चाहते हैं।
- सैयद मसूद उल हसन, पूर्व उपाध्यक्ष एएमयू स्टूडेंट यूनियन
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मोदी का दलित प्रेम ढकोसला है। भाजपा शासित राज्य गुजरात, राजस्थान आदि में दलितों पर जुल्म ढाया जा रहा है। अगर वे सचमुच दलितों का भला चाहते हैं तो जुल्म ढाने वाले भाजपाइयों पर कार्रवाई क्यों नहीं करते। यही हाल एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर है। मोदी का दलित प्रेम सच्चा है तो कार्रवाई कर दिखाएं। जनता सब कुछ समझती है।
- अरविंद आदित्य, जिलाध्यक्ष बसपा