लोक निर्माण्ा मंत्री िश्ावपाल यादव ने अपने दौरे में शहर के सभ्ाी प्रमुख मार्गों के गड्ढे भ्ारने का निर्देश दिया थ्ाा, लेकिन लगता है कि उनका निर्देश भ्ाी सड़कों के गड्ढों में ही कही खो गया है।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल की ड्रीम सड़क रामघाट रोड हो अथवा शेरशाह सूरी द्वारा बनाया गया ऐतिहासिक जीटी रोड । सब सितम ढा रहे हैं। रोड क्षतिगस्त हो चले हैं। सुविधा की जगह वाहनों और वाहन सवारों के लिए काल बन गए हैं। अधिकारी सड़कों की मरम्मत कराने का दावा तो खूब कर रहे हैं लेकिन उच्चाधिकारी सड़क की गुणवत्ता फाइल में देख रहे हैं।
वह फाइल की जगह, अपने वाहन में बैठक सड़क देखेंगे तो सच सामने आ जाएगा। शहर से गुजरने वाली सड़कों का हाल ये तस्वीरें खुद ब खुद बयां कर रही हैं। प्रदेश सरकार के आंकड़ों को सच मान लें तो अपने जिले में सड़कों की कोई कमी नहीं है।
उप्र सांख्यकी डायरी के अनुसार जिले में 1210 आबाद गांव हैं। इनमें से 1168 गांव पक्की में सड़क से जोड़ दिए गए हैं। क्षेत्रफल को आधार मानें तो जिले का कुल क्षेत्रफल 3650 वर्ग किमी है। सड़कों का जाल 3635 किमी है, यानि एक हजार वर्ग किमी क्षेत्रफल में 30 वर्ग किमी सड़क है।
मथुरा बाईपास : सुरक्षित निकलने की नहीं आस
बाईपास पर चलते समय जहां तक आपकी नजर जाएगी सड़क आपको ‘खतरा’ नजर आएगी। मथुरा बाईपास से तो आप गुजरने की सोच भी मत लीजिए। यहां सड़क तो है ही नहीं। कहीं से लगता ही नहीं है कि यह मंडल मुख्यालय का बाईपास है। इससे गुजरने वाला वाहन एक ओर ऐसे झुक जाता है मानों गिर रहा हो। किसी भी वाहन की रफ्तार 10 किमी से अधिक नहीं रह पाती। बीमार और गर्भवती महिलाओं ने इस रोड पर आना छोड़ दिया है। डेंजर जोन में तब्दील होने से इस पर आवाजाही इतनी घट गई है कि अमर उजाला टी टीम करीब 50 मिनट तक इस रोड पर चलती रही लेकिन 50 वाहन नहंी गुजरे। अतिक्रमणकारी इसका फायदा उठा रहे हैं। क्वार्सी से अनूपशहर रोड को जोड़ने वाले बाईपास की पटरी कट गई हैं, कटी क्या हैं, पटरियां कटकर गायब ही हो गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कमिश्नरी के सामने से रोड जा रहा है। दसियों अधिकारी इस पर चल रहे हैं कोई खबर नहीं ले रहा।
रामघाट रोड पर आते ही याद आएंगे राम
राजस्थान के राज्यपाल का ड्रीम प्रोजेक्ट और अलीगढ़ की लाइफ लाइन रामघाट रोड पर चलना ईश्वर को याद करने जैसा हो गया है। यह सड़क उखड़ने लगी है। सड़क की गिट्टियां ऐसे पड़ी है कि जरा सी चूक हुई नहीं कि आप अस्पताल पहुंचे नहीं। पीएसी के सामने तो बड़ा गड्डा हो गया है। पटरियां खत्म हो गई हैं। बालू गिट्टी आदि के व्यापारियों व अन्य अतिक्रमण ने रोड को एक ‘समस्या’ में तब्दील कर दिया है।
सड़क पर यहां कौन डाल रहा कूडा
मथुरा रोड की हालत अन्य रोड से तो अच्छी है लेकिन रखरखाव और निगरानी के अभाव में बहुत जल्दी ही अन्य रोड की तरह जर्जर हो जाएगा। अतिक्रमण और कूडा इसके लिए अभिषाप बन रहे हैं। आप राजऋषि छत्रपति शाहूजी महाराज द्वार पर एक नजर डालेंगे तो पूरी स्थिति साफ हो जाएगी कि कैसे चलने लायक इस रोड की दुर्दशा की जा रही है।