डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय की लेटलतीफी का खामियाजा एक बार फिर बीएड विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है। विवि की लापरवाही के कारण बीएड द्वितीय वर्ष के करीब एक हजार परीक्षार्थियों की छात्रवृत्ति पर खतरा मंडरा रहा है। बीएड प्रथम वर्ष के परीक्षाएं अभी हुई नहीं हैं, और छात्रवृत्ति फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित है। प्रथम वर्ष का रिजल्ट न होने के कारण विद्यार्थी फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं।
शासन के निर्देशानुसार आरक्षित और अनारक्षित विद्यार्थियों को फीस के बराबर छात्रवृत्ति दिए जाने का प्रावधान है। अनारक्षित विद्यार्थियों के अभिभावकों की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। जनपद में 25 से अधिक बीएड कॉलेज हैं।
इसमें द्वितीय के करीब 1400 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो करीब एक हजार विद्यार्थी छात्रवृत्ति के पात्र हैं। इन्हें द्वितीय वर्ष की फीस के बराबर लगभग (30 हजार रुपये) छात्रवृत्ति दी जानी है। लेकिन एग्जाम न हो पाने के कारण विद्यार्थी छात्रवृत्ति फॉर्म फार्म नहीं भर पा रहे हैं।
जिले के तीनों एडेड कॉलेज डीएस महाविद्यालय, एसवी कॉलेज और टीकाराम कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि इस बार भ्रम की स्थिति है। जब तक रिजल्ट नहीं आएगा, छात्रवृत्ति फॉर्म नहीं भरवा सकते। इस बार छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति फॉर्म भरने से चूक जाएंगे।
फीस जमा करो, हम दिलाएंगे छात्रवृत्ति
इस भ्रम की स्थिति में भी जिले के कई निजी कॉलेज संचालक विद्यार्थियों से द्वितीय वर्ष की फीस जमा कराकर छात्रवृत्ति दिलाने का दावा कर रहे हैं। कॉलेज संचालकों का कहना है कि फीस जमा करने से छात्रों का पंजीकरण हो जाएगा। पंजीकरण संख्या के आधार छात्रवृत्ति फॉर्म भर दिया जाएगा। अब सवाल यह है कि न तो एग्जाम हुए और न हीं रिजल्ट आया। जब तक फॉर्म में प्राप्तांक नहीं भरे जाएंगे, वह कैसे सबमिट होगा। जानकारों की मानें तो फीस लेकर कॉलेज संचालक अपना पैसा सुरक्षित करना चाहते हैं।