राम मंदिर आंदोलन को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह एवं विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष स्व. अशोक सिंघल ने धार दी थी। दोनों नेताओं का संबंध अलीगढ़ से है। इसके अतिरिक्त अनगिनत लोग हैं, जो राम मंदिर आंदोलन के दौरान जेल गए, लाठी खाई और तरह-तरह की यातनाएं सहीं।
6 दिसंबर 1992 को कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। विवादित गुंबद ध्वस्त होने के कुछ समय बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। विहिप नेता अशोक सिंघल ने तो आंदोलन का राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व किया था। स्थानीय स्तर पर भी आरएसएस, विहिप और भाजपा सहित विभिन्न संगठनों के लोग सक्रिय रहे। भाजपा नेता राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ कहते हैं कि 1990 में कल्याण सिंह के साथ वह दो दिन के लिए कानपुर जेल में बंद हुए थे। 12 अक्तूबर 1990 को पुलिस अधिकारियों द्वारा शहर के 21 लोगों को उठा लिया गया था।
अगले दिन आगरा सेंट्रल जेल भेज दिया गया। जेल गए नेताओं में राजेंद्र चीफ के अतिरिक्त प्रो. कृष्ण सक्सेना, पूर्व विधायक स्व. कृष्ण कुमार नवमान, बृजभूषण राठी, हरीश चंद्र, श्याम बाबू गुप्ता, अनिल जलाली, सतीश कलियर, राधा रमण शर्मा, रामचंद्र देशप्रेमी, दाऊदयाल गुप्ता आदि शामिल थे। जेल भेजे गए नेताओं पर सांप्रदायिकता भड़काने का आरोप लगा था। उस समय राजेंद्र सिंह ढिल्लन एसएसपी एवं सरदार गुरदर्शन सिंह एसपी सिटी थे। आरकेएस राठौर सीओ प्रथम थे।
पूनम बजाज कहती हैं कि राम मंदिर आंदोलन में स्थानीय स्तर पर सत्य प्रकाश नवमान, भगवान दास नेताजी, शांति स्वरूप माहेश्वरी, ज्योति स्वरूप राष्ट्रीय, नीरव अरोड़ा, रघुराई गर्ग, डॉ. विश्वनाथ कौशिक, मनोज आर्य, देवेंद्र सक्सेना, योगेश सक्सेना, शुचेंद्र मणि, सुनील पाली, विपिन गर्ग आदि भी बेहद सक्रिय थे। आंदोलन के दौरान सक्रिय महिलाओं में डॉ. रेखा आर्या, शालिनी तिवारी, प्रभा, प्रीति, समीक्षा, डॉ. पदमा शर्मा, पदम गुप्ता आदि शामिल थीं।