इस विषय में गूलर रोड स्थित पाठक गन हाउस के संचालक प्रदीप पाठक बताते हैं कि वे फुटकर के साथ थोक का भी काम करते हैं। इसलिए अभी इस धंधे में हैं। बात अगर जमा लाइसेंसी शस्त्रों की करें तो उनके यहां 90 शस्त्र दस-दस वर्ष से अधिक समय से जमा हैं। दो सौ रुपये प्रति माह किराये पर ये शस्त्र जमा हैं। कोई लेने नहीं आया। एक रिवाल्वर तो 2007 से जमा है। बात अगर हथियार बिक्री की करें तो नए लाइसेंस बन नहीं रहे। एक नाली व दोनाली बंदूकों की बिक्री पूरी तरह बंद है। उनकी कीमतों की भी हालत दयनीय है। किराये पर जो रखी हैं, उनकी कीमत से ज्यादा किराया हो गया है, इसलिए उन्हें लोग लेने नहीं आ रहे। अब दूसरे व्यापार की ओर जाना सोच रहे हैं। दोदपुर इंपीरियल गन हाउस के स्वामी अब्दुल्ला कबीर शेख कहते हैं कि जब लाइसेंस ही बनने बंद हो गए तो शस्त्रों की बिक्री कहां से होगी।
शस्त्रों के कारोबार में दूर दूर तक पहचान रखते थे यह नाम
अलीगढ़ के शस्त्र विक्रेताओं के अनुसार शहर में पुराने दौर के कई बड़े नाम थे। जिनमें सुरेश गन हाउस, श्रीराम गन हाउस, सिंह गन हाउस। इनके यहां से हर महीने बड़ी संख्या में शस्त्रों की बिक्री हुआ करती थी। लेकिन आज कारोबार पूरी तरह से सिमट चुका है।
यह भी जानें
- 37383 शस्त्र लाइसेंस हैं जनपद में
- 61 शस्त्र की दुकानें थी अब 22 रह गई हैं
- 38 दुकानें शहर में थीं, जिनमें 12 रह गईं
- 23 दुकानें देहात में थीं, जिनमें 10 रह गईं