सीएए, एनआरसी, एनपीआर, जेएनयू हिंसा, एएमयू में हुई हिंसा के विरोध और कुलपति व रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग को लेकर मंगलवार को एएमयू में अलग-अलग तरीके से अलग-अलग धरना प्रदर्शन हुए। दोपहर को व्हाइट कोट मार्च निकाला गया। साथ ही फ्रीडम मार्च आयोजित किया गया। दोपहर बाद बाब-ए-सैयद पर सभा का भी आयोजन किया गया। जिसे वैज्ञानिक व उर्दू लेखक गौहर रजा और पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी ने संबोधित किया।
गौहर रजा ने कहा कि यह मेरी यूनिवर्सिटी है। इसने मुझे हिंदुस्तान की खिदमत करने के लिए तैयार किया। आज जो देश के हालात हैं, उसमें चाहे कोई वैज्ञानिक हो, छात्र हो, कोई शहरी हो, उसे सड़क पर आने को मजबूर होना पड़ रहा है। सीएए व एनआरसी जो यह सरकार लेकर आई है, वह पिछले 70 वर्षों में देश के संविधान पर सबसे बड़ा हमला है। हमला इसलिए नहीं कि अमित शाह ने संसद में कहा कि छह धर्मों के लोगों को नागरिकता देंगे। बाकी के धर्मों को के लोगों को पहले की प्रक्रिया से ही नागरिकता देंगे। बल्कि, इसकी जरूरत क्या थी, जब पहले से ही कानून था। इसमें अगर मुसलमानों का नाम जोड़ भी दिया जाए तो भी यह संविधान पर उतना ही बड़ा हमला होगा। क्योंकि संविधान कह रहा है कि नागरिकता की बुनियाद धर्म नहीं हो सकती है। जबकि यह कानून कह रहा है कि नागरिकता की बुनियाद धर्म होगा।
आज फैज अहमद फैज से जितना डर जनरल जिया को लग रहा था, उतना ही डर आज फैज से मोदी को लग रहा है। फर्क सिर्फ इतना है जिया फौज के कंधों पर बैठकर आए थे। यह फौज को कंधों पर बैठाकर घूम रहे हैं। यह शायरों और रचनाकारों के पुरस्कार वापस करने को गैंग कहते हैं, यह फासिस्जम की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि मुझे फख्र है कि 500 से ज्यादा शायरों ने अपने पुरस्कार वापस किए हैं। इस मुल्क की जड़ों को खोदने वाले थक जाएंगे पर खोद नहीं पाएंगे।
इससे पहले छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी ने कहा कि इस वक्त सुप्रीम कोर्ट को बड़ी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है। सीएए में धर्म को आधार बनाया है जो कि संविधान की धारा 14 का उल्लंघन है। 15 दिसंबर की रात हुई घटना के लिए जिम्मेदार सबसे पहले यूपी पुलिस है। साथ ही पुलिस को इजाजत देने वाले लोग हैं।
इस अवसर पर छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन, मो. शिकोह, मो. शाजली, इंजमाम उल हक आदि छात्र नेता मौजूद थे। इससे पहले दोपहर को दो मार्च निकाले गए। यह मार्च चुंगी गेट से बाब ए सैयद तक निकाला गया। इस दौरान हाथों में तिरंगा, सीएए विरोधी पंफलेट आदि मौजूद थे।
अपने भी गैर दिखने लगें ऐसा न कीजिए
आईआईटी दिल्ली के प्रो. वीके त्रिपाठी ने बाब ए सैयद पर अपने ही अंदाज में छात्रों से बात की। उन्होंने अपने संबोधन के साथ ही एक गजल पढ़ी जिसमें उन्होंनेे खूब वाहवाही बटोरी। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि एनआरसी के सवाल पर 12 राज्य तैयार नहीं हैं। अगर आप टिके रहें इसी बात पर तो सारे मुल्क में सरकार को कदम वापस लेने होंगे। उन्होंने गजल के माध्यम से कहा कि
‘नजरों की बदगुमानी का परदा न कीजिए, अपने भी गैर दिखने लगें ऐसा न कीजिए,
मासूम की शक्ल भी जिनमें न दिख सके, ऐसे उजालों का कभी पीछा न कीजिए’