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Aligarh News: अंबे तू है, जगदंबे काली.. घर-घर गूंजती आरती, लिखने वाला गुमनाम

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मां दुर्गा की विश्व प्रसिद्ध आरती अंबे तू है जगदंबे काली... की रचना शहर के स्व. राजेंद्र कुमार शर्मा उर्फ रज्जो गुरु ने की थी, यह दावा साहित्याकरों ने किया है। उन्होंने मंगलवार को एसडीएम से मिलकर वास्ताविक रचनाकार को इसका श्रेय दिलाने की मांग की है।
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हर घर में आरती में गाए जाने वाले इस भजन को गायिका अनुराधा पौढवाल ने भी गाया है। आशु कवि अनिल बौहरे, डाॅ.उपेंद्र झा, सोनाली, सुशीलचंद अग्निहोत्री एडवोकेट, डाॅ. सत्यप्रकाश और रूपम कुशवाह ने एसडीएम राजबहादुर सिंह से बताया कि रचनाकार को इसका श्रेय जरूर मिलना चाहिए। जिससे दुनिया को पता चल सके कि इस रचना को किसने लिखा था।





स्व.राजेंद्र कुमार शर्मा उर्फ रज्जो गुरु दशकों पहले तक शहर की सीकना पान गली में रहते थे। उनकी इस रचना के लगभग 50 वर्ष हो चुके हैं। अब उनका परिवार कहां है, इसकी जानकारी किसी नहीं है। साहित्यकार केवल यही कहते हैं कि उनके परिजनों की तलाश, तभी हो सकती है, जब उनकी रचना के बारे में लोगों को पता चलेगा। शायद इसी माध्यम से उनके परिवार वालों से संपर्क हो सकेगा।
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साहित्यकारों की समस्याओं का कराया जाए समाधान

कवियों ने एसडीएम से साहित्यकारों की अन्य समस्याओं के निदान का आग्रह किया। अनिल बौहरे ने कहा कि क्षेत्र के साहित्यकारों की डायरेक्टरी बनाई जाए। जिससे कोई भी व्यक्ति कहीं से भी उनके बारे में जानकारी जुटा सके। साहित्यकारों और कवियों को आर्थिक सहयोग कराने और राजा दयाराम एवं काका हाथरसी के योगदान को भी महत्व दिलाने की मांग की गई।




अगर साहित्यकारों का दावा उचित है तो इसे देश के दो प्रमुख अखबारों में प्रकाशित कराकर इस पर आपत्ति मांगी जाए। अगर कोई आपत्ति नहीं आती है तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इन साहित्यकारों की ओर से सिविल न्यायालय में एक वाद दाखिल किया जाएगा। इसके बाद आरती का कॉपीराइट उनके नाम पर हो सकता है। राजबहादुर सिंह एसडीएम, सदर
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