गोवर्धन पूजा के मौके पर शुक्रवार को शहर के बाजारों में अन्नकूट की सब्जी 120 रुपये से लेकर 180 रुपये किलो तक बिकी। श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के चलते रेट की परवाह न करते हुए जमकर सब्जियां खरीदी और अन्नकूट प्रसादी बनाया। सुबह-सुबह शहर के बाजारों में लोगों की भीड़ दिखाई दी, जबकि गली-महोल्ले और अपार्टमेंट में ढकेल से सब्जियां बेचने वाले लोगों ने भी मनमाने दाम वसूले।
गोवर्धन पूजा में अन्नकूट का काफी महत्व है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु बृजवासियों की तरह अन्नकूट महोत्सव का आयोजन करते हैं। श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि द्वापर युग में इंद्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उंगली से उठा लिया था।
इसकी व्याख्या इस तरह भी की जाती है कि उन्होंने सामूहिक रूप से कृषि करने का संदेश लोगों को दिया था। बृजवासी मानते थे कि इंद्र के कारण ही वर्षा होती है। जिससे उनकी खेती समृद्ध होती है, लेकिन श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि खेती इंद्र के कारण नहीं, बल्कि उनके परिश्रम के कारण से समृद्ध होती है।
इसी प्रसंग को आत्मसात करने के लिए श्रद्धालु गोवर्धन पूजा का धूमधाम से आयोजन करते हैं। इस पूजा में अन्नकूट प्रसादी काफी महत्व रखता है। इसीलिए लोग सुबह ही बाजारों में सब्जियां खरीदने पहुंचे।
कई लोगों ने तो अलग-अलग रेटों के हिसाब से सब्जियां खरीदी, जबकि कई लोगों ने इकट्ठे अन्नकूट की सब्जियां खरीदीं। इन सब्जियों में आलू, मूली, बैंगन, भिंडी, कच्चे केला, पपीता, अरबी, फूल गोभी, पत्ता गोभी, धनिया, टमाटर, विभिन्न फलियां, करेला, पालक और हरे साग, हरी मिर्च आदि शामिल थे।