जिले में वैक्सीनेशन की स्थिति सुधारने के लिए कोटेदारों की दुकानों पर कोरोना टीकाकरण की स्कीम में पहले ही दिन स्वास्थ्य टीमों की कमी रोड़ा बन गई। मात्र शहरी क्षेत्र की राशन की दुकानों पर लागू इस स्कीम में शनिवार को मात्र 196 दुकानों पर ही टीकाकरण शिविर लग सके, वह भी शिफ्टवार। हालांकि नतीजे फिर भी उत्साहजनक रहे। इस दौरान देर सायं तक करीब 50 हजार उपभोक्ताओं के टीके लगाए गए।
वैक्सीनेशन के मामले में अलीगढ़ प्रदेश में 68वें स्थान पर है। पिछले दिनों वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री ने इस स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई और डीएम को 30 नवंबर तक वैक्सीनेशन का लक्ष्य पूर्ण करने के आदेश दिए। इस स्थिति को सुधारने के लिए इन दिनों डीएम समेत अन्य उच्चाधिकारी लगातार स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा करने में जुटे हुए हैं।
गत दिवस लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करने के लिए राशन कोटेदारों के यहां 20 से 30 तारीख तक होने वाले मुफ्त राशन वितरण के दौरान हर कोटेदार की दुकान पर वैक्सीनेशन कैंप लगाने की योजना बनाई गई। कोटेदारों को आदेश दिया गया कि वे उपभोक्ताओं से पूछें कि उनका और उनके परिवार का वैक्सीनेशन हुआ अथवा नहीं, इसके बाद ही राशन वितरित करें।
शनिवार को राशन वितरण शुरू हुआ तो स्वास्थ्य विभाग की टीमें कम पड़ गईं। बाद में तय हुआ कि मात्र शहरी क्षेत्र की 246 दुकानों पर ही टीकाकरण शिविर लगाए जाएं। ग्रामीण इलाकों में तो पहले से ही शिविर चल रहे हैं। बताते चलें कि जिले में कुल 1346 कोटे की दुकानें हैं, लेकिन इससे भी बात नहीं बनी।
शनिवार को मात्र 196 दुकानों पर ही शिविर लगने की व्यवस्था हो सकी। वह भी चार-चार घंटे की शिफ्ट में। बताते चलें कि शहरी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की मात्र 72 टीमें ही सक्रिय हैं। हालांकि सहायक प्रतिरक्षण अधिकारी शरद गुप्ता ने दावा किया कि देर सायं तक 50 हजार उपभोक्ताओं को टीका लग सका है।
जिला पूर्ति अधिकारी राजेश सोनी ने बताया कि स्वास्थ्य टीमों की कमी के कारण शहरी क्षेत्र की 246 में से 196 दुकानों पर ही टीकाकरण शिविर लगे हैं। शेष 50 दुकानों पर बाद में शिविर लगेंगे। टीमें कम होने के कारण हर दुकान पर करीब 4 घंटे का शिविर लगाया गया।
बिना वैक्सीनेशन कराए भी बंटा राशन
वैक्सीनेशन कराने के बाद ही राशन मिलने की व्यवस्था पहले ही दिन तार-तार हो गई। स्वास्थ्य टीमों की कमी के चलते शिफ्टवार टीकाकरण शिविर लगाने तथा कई दुकानों पर शिविर ही न लगने के कारण कोटेदारों ने बिना टीकाकरण सत्यापन के ही उपभोक्ताओं को राशन बांटा।
हालांकि डीएसओ ने यह कहकर व्यवस्था का बचाव किया कि उपभोक्ताओं के लिए राशन लेने से पहले टीकाकरण अनिवार्य नहीं है। उसके बिना भी राशन मिल सकता है। कोटेदारों के यहां टीकाकरण शिविर लोगों की सहूलियत के लिए लगवाए गए हैं।