फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ : गांव पेहरा और हैवतपुर में भी मुआवजे पर सुगबुगाहट शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
राहुल दक्ष
विज्ञापन

खैर के अंडला में बनने जा रहे डिफेंस कॉरिडोर के विस्तार पर अभी से अड़ंगा लगना शुरू हो गया है। अंडला से सटे गांव पेहरा और हैवतपुर में भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। दरअसल, कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित की जाने वाली 250 हेक्टेयर जमीन में से 80 हेक्टेयर जमीन पेहरा और हैवतपुर में तलाशी जा रही है। इससे वहां के किसानों के बीच भी चार गुना मुआवजे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
अंडला में कृषि विभाग की करीब 45 हेक्टेयर जमीन है, जो वन विभाग के नाम पर हस्तांतरित की गई है। बाद में वन विभाग ने उसे यूपीडा को सौंप दिया। इसके बाद इस जमीन के पास ही 8 हेक्टेयर जमीन 15 किसानों से सर्किल रेट के दोगुने दामों पर अधिग्रहण की गई। 17 अगस्त को यहां जमीन का निरीक्षण करने अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी आए। उन्होंने किसानों, प्रधान और उद्योगपतियों के साथ बैठक की। उन्होंने जिला प्रशासन को कॉरिडोर के विस्तार के लिए 250 हेक्टेयर और जमीन खरीदने का निर्देश दिया। उसके अगले दिन से किसान जमीन देने की एवज में चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, डीएम ने साफ कर दिया है कि वह दोगुना मुआवजा ही देंगे।
विज्ञापन

250 हेक्टेयर में से 100 बीघा पर बनी बात
250 हेक्टेयर जमीन में से तहसील प्रशासन ने 170 हेक्टेयर जमीन अंडला में चिह्नित की है। 80 बीघा जमीन हैवतपुर और पेहरा में देखी जा रही है। उक्त 170 हेक्टेयर भूमि के करीब 250 मालिक हैं। इनमें से जिला प्रशासन को अब तक 10-12 किसानों ने ही दोगुने दामों पर जमीन देने पर सहमति पत्र दिया है। इनकी जमीन करीब 100 बीघा बैठ रही है।
गांव के भीतर की है अधिकांश जमीन
अंडला में वर्तमान में 3.30 लाख रुपये प्रति बीघा सर्किल रेट गांव के भीतर की जमीन के लिए और हाईवे किनारे वाली जमीन के लिए 10 लाख रुपये बीघा का सर्किल रेट है। जिस डिफेंस कॉरिडोर के विस्तार के लिए जमीन चिह्नित की गई है। उसमें 80 प्रतिशत जमीन गांव के भीतर वाली है। 20 प्रतिशत ही हाईवे किनारे की भूमि है।
विज्ञापन

जमीन के मुद्दे पर पंचायत चुनाव की बिसात
अंडला में भूमि अधिग्रहण पर विवाद अब सिर्फ मुआवजे तक ही सीमित नहीं रह गया है। इस पर चुनावी बिसात भी बिछ गई है। आगामी समय में पंचायत चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में संभावित प्रत्याशी और राजनीतिक दल अभी से किसानों के रहनुमा के तौर पर आगे आ गए हैं। स्थानीय नेता संभावित प्रत्याशियों को आगे कर चेहरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनको हर प्रकार से समर्थन करते हुए किसी भी प्रकार से इस मुद्दे को गर्म करके राजनीतिक रोटियां सेंकने तैयारी में हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें