आवारा गोवंश के संरक्षण के लिए चिंता तो हर कोई जताता है। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। इसका अंदाजा गोवंश संरक्षण के लिए वर्ष 2019 में शुरू हुई मुख्यमंत्री जन सहभागिता योजना की स्थिति को देखकर लगाया जा सकता है। करीब 40 लाख की आबादी वाले अलीगढ़ जिले में मात्र 651 लोग ही गोवंश संरक्षण के लिए सामने आए हैं। इनके संरक्षण में 2493 गोवंशों को आसरा मिला हुआ है।
गोवंश के कटान पर रोक के बाद योगी सरकार ने तमाम आश्रय स्थल व गो संरक्षण केंद्रों का निर्माण कराया था। वर्तमान में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में 180 गोवंश आश्रय स्थल संचालित हैं। इनमें 24322 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि तहसील गभाना व अतरौली में वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना की गई है।
तहसील इगलास, खैर एवं कोल में गो आश्रय स्थल निर्माणाधीन हैं। इस सबके बावजूद शासन ने आवारा गोवंश को सहारा देने के लिए मुख्यमंत्री जन सहभागिता योजना शुरू की थी। इसमें एक व्यक्ति को अधिकतम चार गोवंश दिए जाने का प्रावधान था।
इनके भरण पोषण के लिए सरकार प्रत्येक गोवंश के लिए 30 रुपये रोजाना देती है। लेकिन गो प्रेमियों की बेरुखी के चलते यह योजना भी परवान नहीं चढ़ सकी। वर्तमान में मात्र 651 गोप्रेमी ही योजना के लिए आगे आए हैं। इनके संरक्षण में 2493 गोवंश रह रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ चंद्रवीर सिंह ने बताया कि शासन द्वारा गोवंश के भरण पोषण के लिए अब तक कुल 2360 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। कुल 651 लाभार्थियों को 2494 गोवंश देते हुए उनको अगस्त एवं सितंबर के भरण पोषण के लिए 10.97 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।