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कोरोना को हराना है, टीका जरूर लगवाना है

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कोरोना को हराने के लिए सावधानी, सुरक्षा और सतर्कता के साथ-साथ कोविड रोधी टीका बेहद जरूरी है। ये कहना है उन युवाओं (एक्टिविस्ट) का, जो कोविड के दौर में हर स्तर पर सक्रिय रहे। किसी ने मरीजों को टीके लगाए, किसी ने जांच की तो किसी ने कोविड से मृत शवों के अंतिम संस्कार कराने में जिम्मेदारी निभाई। आज ये लोग एक ही बात कहते हैं कि हम और हमारा परिवार सुरक्षित है तो सावधानी के साथ-साथ टीके की वजह से। अगर टीका न लगवाया होता तो किसी परेशानी में घिर गए होते।
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आज हम बात कर रहे हैं, उन एक्टिविस्टों की, जिन्होंने कोविड के दौर में किसी न किसी तरह से अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है, चाहें वह मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी हों या फिर दीनदयाल अस्पताल में लैब टेक्नीशियन संजय कुमार या टीकाकरण इंचार्ज गीता डे। हर कोई जानता है कि बंटी ने कोरोना की दोनों लहरों में उन लाशों का अंतिम संस्कार नुमाइश स्थित मुक्तिधाम में कराया, जिन्हें परिवार के लोग छूने तक के लिए तैयार न थे। परिवार व दोस्तों का विरोध झेला। इसी तरह घर-घर टीका लगवाने व जांच करने जाने वाले संजय कुमार और संक्रमित मरीजों का उपचार करने वाली गीता डे भी सुरक्षित हैं। गीता खुद कोविड संक्रमित हुईं, मगर पहली डोज लगी होने की वजह से कोई असर नहीं पड़ा।
- मैंने कोरोना की पहली और दूसरी लहर में 460 से अधिक उन लोगों के अंतिम संस्कार में सहयोग किया, जिनकी कोरोना काल में जान गई। शुरुआत में मैं डरा, मेरे परिवार ने विरोध किया, मगर शुरुआत में सावधानी से काम किया। फिर कोविड का टीका लगवाया। इससे खुद को सुरक्षित किया और परिवार को भी सुरक्षित रखा। ये संभव हुआ सिर्फ कोविड के टीके की वजह से। मेरी लोगों से अपील है कि कोरोना रोधी टीका जरूर लगवाएं। - विष्णु कुमार बंटी, अध्यक्ष मानव उपकार संस्था।
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- कोविड की पहली व दूसरी लहर का वो दौर मैंने देखा, जब लोग एक दूसरे के घर जाने में कतराते थे। उस दौर में कोविड संक्रमित लोगों के घर जाकर उनकी जांच की और उनको टीके लगवाए। खुद को और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रखा, ये मैं ही जानता हूं। शुरुआत में डर जरूर था, मगर जब कोविड का टीका आया और फ्रंट लाइन वर्कर के रूप में मुझे टीका लग गया तो डर दूर हो गया। उसी टीके की वजह से हम सुरक्षित हैं। लोगों को भी टीका लगवाना चाहिए। - संजय कुमार, लैब टेक्नीशियन।
- हमने कोविड के दौर में अपने परिवार से दूर रहकर मरीजों को प्राथमिकता दी। उनकी जांच करना, टीका लगवाना, उनको उपचार के साथ खाना देना, ये सभी काम किए। जरूरत पर अस्पताल की रसोई तक संभाली। शुरुआत में परिवार ने डराया, मगर मैंने अपने काम को आगे रखा। कोविड रोधी टीका आने पर सबसे पहले मैंने टीका लगवाया। फिर हमारा डर निकल गया। हम आज टीके की वजह से सुरक्षित हैं। सभी से अपील है कि वे टीका जरूर लगवाएं। - गीता डे, हेल्थ विजिटर/ वैक्सीनेशन इंचार्ज
- मैंने कोविड रोधी टीके की दोनों डोज ली हैं। मुझे किसी तरह की समस्या नहीं हुई। टीकाकरण के बाद मैं खुद और मेरा परिवार सुरक्षित हुआ है। हमने कोरोना की पहली व दूसरी लहर में जो हालात देखे हैं, उससे बचने के लिए कोविड रोधी टीका लगवाना बेहद जरूरी है। मेरी सभी से अपील है कि कोविड रोधी टीका अवश्य लगवाएं, ताकि हमारा समाज और हम सब सुरक्षित रह सकें। - अरनी शर्मा, दसवीं की छात्रा, एएमयू

गीता डे । - फोटो : CITY OFFICE

संजय कुमार । - फोटो : CITY OFFICE

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