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अलीगढ़ः पीएम को भीष्म, सीएम को अर्जुन और रक्षामंत्री को टी-55 ट्रोल टैंक देने की तैयारी

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डिफेंस सप्लाई सेंटर में तैयार सैनिकों और टैंकों के मॉडल। राजा तिवारी - फोटो : CITY OFFICE
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आशीष निगम
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इन दिनों लद्दाख सीमा पर भारतीय सेना का भीष्म टैंक तैनात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार को अलीगढ़ में इसी टैंक का हूबहू मॉडल उपहार में भेंट किया जाएगा। हाथ से बनाए गए इस टैंक पर गोल्डन पॉलिश है। सीएम योगी आदित्यनाथ को अर्जुन टैंक और केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के लिए टी-55 ट्रोल टैंक का मॉडल तैयार किया गया है। तीनों टैंक के मॉडलों की कीमत लगभग 70 हजार रुपये आई है। अलीगढ़ में ही इन सभी को कंप्यूटराइज्ड डिजाइनिंग से मेटल पर तैयार किया गया है।
पीएम मोदी पहली बार जब वर्ष 2015 में फ्रांस की यात्रा पर गए थे तो अलीगढ में बना चांदी का वार मेमोरियल साथ ले गए थे, जिसे उन्होंने फ्रांस के रक्षामंत्री को दिया था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान यूरोप की ओर से लड़ते हुए शहीद भारतीय सैनिकों की याद में ये वार मेमोरियल बनाया गया था। चांदी से बने इस मॉडल की कीमत लगभग 90 हजार रुपये थी।
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वर्ष 1975 में स्थापित डिफेंस सप्लाई सेंटर ये अनूठा काम करने वाली अलीगढ़ की इकलौती फर्म है। राष्ट्रपति भवन से लेकर सेना की कई बटालियन में यहां के बने यादगार स्मृति चिह्न लगे हैं। दरअसल, सेना में इस्तेमाल होने वाले स्मृति चिह्न, टैंक, सैनिक, गन, वार मेमोरियल के शानदार मॉडल दशकों से यहां बन रहे हैं, जिनकी मांग देश विदेश में हैं। इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया की सेनाओं में भी इसकी सप्लाई हो चुकी है।
एएमयू के प्रोफेसर ने खड़ी की थी कंपनी
एएमयू के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. ललित किशोर ब्रिजकौसली ने वर्ष 1975 में डिफेंस सप्लाई सेंटर की शुरूआत सासनीगेट इलाके में की थी। उनके बेटे विजय ब्रिजकसौली ने बताया कि देश के जानेमाने उद्योगपति घनश्याम दास बिरला के निधन पर उनकी हूबहू पीतल की मूर्तियां रिश्तेदारों को देने के लिए पहली बार इस कंपनी ने काम किया था। ये पीतल की मूर्तियां हाथ से बनाई गई हैं। इसके बाद राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद, नीलम संजीव रेड्डी और ज्ञानी जैल सिंह के समय यहां से कई स्मृति चिन्ह राष्ट्रपति भवन की शोभा बने। उद्योगपति राहुल बजाज के बेटे संजय बजाज की शादी में पीतल के छोटे स्कूटर भी इसी कंपनी ने बनाए। फील्ड मार्शल केएम करियप्पा, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के साथ रायफल मैन गबर सिंह नेगी, कैप्टन केके नैयर, नायक जसवंत सिंह, नायक दीवान सिंह की हूबहू प्रतिमाएं यहां बनाई गई हैं। राजपूताना रेजीमेंट फतेहगढ़ में 1400 किलो की महाराणा प्रताप की प्रतिमा और डोगरा रेजीमेंट, फैजाबाद में तीन टन की पीतल की दीवार पर 2100 शहीदों के नाम का लेख भी यहीं बना।
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टैंक मॉडल बनाने में कंपनी को महारत
वर्ष 1969 के सेंचुरियन टैंक, वर्ष 1974 के विजयंता टैंक, वर्ष 1985 में टी-55, वर्ष 1995 में टी 72, टी-19 भीष्म टैंक, वर्ष 2012 में अर्जुन टैक, मैकेनाइज्ड इंफ्रेंट्री के बख्तरबंद वाहन के साथ सैनिकों की सैकड़ों प्रतिमाएं, बंदूकें, तोपें आदि के मॉडल यहां बनते रहते हैं।
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