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खेल में कबड्डी कबड्डी की बजाय मेरे स्पोर्ट्स टीचर पहाड़े बुलवाते थे : जफर इकबाल

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दीपक शर्मा
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शिक्षक दिवस के अवसर पर भारतीय हॉकी की ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रहे जफर इकबाल ने अमर उजाला के साथ हुई बातचीत में कहा कि कक्षा 5 में गणित के टीचर अनवारुल हक ने उन्हें बहुत प्रभावित किया। बाद के समय में उनके स्पोर्ट्स टीचर अब्बास साहब ने उनके खेल जीवन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जफर इकबाल ने कहा कि वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मिंटो सर्किल स्कूल में पढ़ा करते थे। उनके स्पोर्ट्स टीचर अब्बास साहब जमकर खेल खिलाया करते थे। उन्हें अभी तक याद है कि कबड्डी के दौरान खिलाड़ी को कबड्डी-कबड्डी बोलना होता था, लेकिन वह इस शब्द की जगह पहाड़े बुलवाया करते थे। इससे खेल भी होता था और साथ-साथ पहाड़े भी याद हो जाया करते थे। उनके द्वारा अभ्यास कराए गए पहाड़े उन्हें आज भी याद हैं। उस समय कंप्यूटर नहीं हुआ करता था। आज यह बहुत सामान्य बात है।
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आज की पीढ़ी कैलकुलेटर से गणित हल करती है, लेकिन यह पहाड़े उन्हें सिर्फ इसलिए याद हैं, क्योंकि कबड्डी खेलने के दौरान उन्हें याद कराए गए थे। इस तरह एक शिक्षक की भूमिका पूरे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। जफर इकबाल ने कहा कि उस समय हमारे स्कूल के बराबर एक खेल का मैदान हुआ करता था जिस पर उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया था, लेकिन आज उस मैदान पर सरोजनी नायडू हॉल का एक हिस्सा बना दिया गया है। वह खेल मैदान खत्म हो गया है। उस मैदान से जुड़ी यादें अभी मेरे जेहन में ताजा हैं। अच्छा होता उस मैदान को संभाल कर रखा जाता, जिससे आज के बच्चे भी उसका इस्तेमाल कर पाते।
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