दवा व्यापारी को कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद बंद पड़ा फफाला बाजार।
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कोरोना वायरस ने अलीगढ़ में भी मेडिकल ट्रांसमिशन के जरिये फैलना शुरू कर दिया है। शहर में अब तक आठ केस ऐसे मिले हैं, जिनमें इस वायरस का संक्रमण चिकित्सालयों से लगने की पुष्टि हुई है। इन केसों में मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों सहित जंगलगढ़ी के एक प्राइवेट अस्पताल की महिला चिकित्सक और उसका पति भी शामिल है। वहीं, चिकित्सालयों में उपचार कराने गए तीन मरीजों को भी यहीं से संक्रमण लगने की बात सामने आ रही है।
ऐसे में जिला प्रशासन के सामने इस प्रकार से फैल रहे संक्रमण को रोकना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। जिला प्रशासन से लेकर बरौली विधायक इस प्रकार से फैल रहे संक्रमण को लेकर पहले ही जेएन मेडिकल कॉलेज को कठघरे में खड़ा कर चुके हैं। मगर, अभी तक मेडिकल ट्रांसमिशन की चेन को तोड़ने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं हुआ है। बीती 20 अप्रैल के बाद कोरोना संक्रमितों के मिलने का सिलसिला शुरू हुआ है। इसके बाद मेडिकल कालेज के दो पुरुष और एक महिला डॉक्टर संक्रमित पाई गई। इसके बाद रसलगंज इलाके की एक महिला मेडिकल कालेज में उपचार कराने गई थी। वह भी बाद में संक्रमित हो गई।
इधर, जंगलगढ़ी के निजी अस्पताल की महिला डॉक्टर और उसके पति को कोरोना संक्रमित पाया गया। यहां उपचार को गई। जयगंज इलाके की एक गर्भवती महिला को भी संक्रमण लग गया। आठ मई को मलखान सिंह अस्पताल में उपचार को गई सासनी गेट इलाके की एक गर्भवती महिला भी दस मई को कोरोना संक्रमित पाई गई। इन सब केसों को देखते हुए जिला प्रशासन के होश उड़ गए हैं। जिला प्रशासन इस प्रकार के संक्रमण को रोकने की लगातार कोशिश करने में लगा है।
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह के मुताबिक मेडिकल ट्रांसमिशन की बात शुरूआत से ही सामने आने के बाद ओपीडी से लेकर इमरजेंसी केस तक के लिए व्यवस्थाएं निर्धारित की गई हैं।