बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भाषण में अपने पूर्व शासनकाल के बहाने मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की। अपने भाषण में उन्होंने भाजपा-सपा का 12-12 बार जिक्र किया, जबकि तीन बार मुसलमानों का भी नाम लिया।
मायावती ने पहले भाजपा, सपा व कांग्रेस के शासन की आलोचना की। इसके बाद उन्होंने अपने चार बार मुख्यमंत्रित्वकाल के शासन का जिक्र किया, जिसमें सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के सिद्धांत को अपनाया गया। सर्व समाज को कानून का राज दिया। उनके भाषण में कई बार यह सुनने को मिला। मतदाताओं से पांचवीं बार इसी शासनकाल को फिर से देखने के लिए अपील भी की। मायावती ने भाषण में बसपा का 16 बार नाम लिया, जबकि कांग्रेस का सात बार नाम लिया। कई बार अनुसूचित जाति व पिछड़े वर्ग का भी नाम लिया।
मायावती जब मंच पर पहुंचीं तो उन्होंने प्रत्याशियों के बारे में जानकारी ली। मुख्य मंच पर प्रत्याशी नहीं थे। मुख्य मंच के सामने दो मंच बनाए गए थे। एक मंच पर प्रत्याशी बैठे थे। मायावती को अवगत कराया गया कि उनकी दाहिनी ओर बने मंच पर प्रत्याशी हैं। उन्होंने प्रत्याशियों का प्रणाम स्वीकार किया। मुख्य मंच पर राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव मुनकाद अली, सूरज सिंह बघेल मौजूद रहे। नुमाइश मैदान में बने सभा स्थल के ऊपर जैसे ही दोपहर 1:50 बजे बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का हेलिकॉप्टर दिखा, वैसे ही मंच से ‘जिंदाबाद और अमर रहें, के नारे लगने शुरू हो गए। मायावती दोपहर 2:03 बजे मंच पर आईं और नारेबाजी रोकने का इशारा किया। सभा में शहर विधानसभा क्षेत्र प्रत्याशी रजिया खान, कोल प्रत्याशी डॉ. बिलाल, छर्रा से तिलकराज यादव, खैर से चारू केन, बरौली से पंडित नरेंद्र शर्मा, इगलास से सुशील कुमार, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तेजवीर सिंह, जिलाध्यक्ष रतनदीप सिंह मौजूद रहे।
सभा खत्म होते ही टूट गए बैरिकेडिंग
मायावती की जनसभा खत्म होते ही लोगों की भीड़ मायावती को देखने के लिए कुर्सियों पर चढ़ गई। इससे बैरिकेडिंग टूट गई। इस दौरान लोग बसपा का झंडा लहराते रहे। युवाओं और महिलाओं में काफी उत्साह था। मायावती के रोजी-रोटी की घोषणा पर युवाओं ने खूब तालियां बजाईं।
50 किलो की हाथी की मूर्ति नहीं कर सके भेंट
मायावती को स्मृति चिह्न भेंट करने के लिए 50 किलो पीतल की हाथी की मूर्ति जिले के एक प्रत्याशी अपने साथ लाए थे, लेकिन न तो वह मंच तक पहुंच सके और न ही हाथी की मूर्ति मायावती तक पहुंच पाई। मजबूरन प्रत्याशी को वापस ले जानी पड़ी।