मलखान सिंह जिला अस्पताल की मोर्चरी में आठ दिन तक शव रखने की जांच तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। इस कमेटी में डाॅ. एके रस्तोगी, डाॅ. मयंक बंसल और डॉ. पीयूष चौबे को शामिल किया गया है। शव रखने की जानकारी छिपाई गई गई थी, जिसे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आ रही है।
बीती 28 अप्रैल को लगभग 52 वर्षीय अज्ञात बीमार व्यक्ति को कुछ लोगों ने मलखान सिंह जिला अस्पताल के वार्ड नंबर चार के बेड नंबर-2 पर भर्ती कराया था। उपचार के दौरान उसी दिन उसकी मौत हो गई थी। लावारिस होने के चलते उसका शव अस्पताल में मोर्चरी में रखवा दिया गया, जो 5 मई तक ऐसे ही रखा रहा था। जब अस्पताल की मोर्चरी के प्रभारी को याद आया तो शव का पोस्टमार्टम 6 मई को कराया गया। इसकी रिपोर्ट में लिखा है कि शव लगभग आठ दिन पहले का है।
इस मामले में पुलिस ने जो पंचनामा भरा, उसमें मृत्यु की तिथि 2 मई की रात 8:15 बजे अंकित की गई। इस खबर को अमर उजाला में छह मई के अंक में प्रकाशित किया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन पूरे मामले के गुपचुप निस्तारण में जुट गया। आठ मई को सीएमएस डॉ. जगवीर सिंह ने इमरजेंसी प्रभारी को कारण बताओ नोटिस भी दे दिया था। सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि आठ दिन तक अज्ञात शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखने की जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। इस संबंध में सीएमएस से जानकारी मांगी गई है।
मोर्चरी में आठ दिन तक शव रखने के मामले की जांच डाॅ. एके रस्तोगी, डाॅ. मयंक बंसल और डॉ. पीयूष चौबे करेंगे। उनकी जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाएगी।-डॉ.जगवीर सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल।