इस मुद्दे पर प्रेसवार्ता के दौरान सपा प्रतिनिधि मंडल के प्रमुख सदस्य सांसद जियाउर्रहमान वर्क, विधायक कमाल अख्तर, पूर्व सांसद चौ.बिजेंद्र सिंह ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा किया। इन नेताओं ने कहा कि बेशक सपा हमेशा से प्रदेश सरकार के बुलडोर अभियान का विरोध करती रही है। मगर इस घटना में अभी तक बुलडोजर कार्रवाई की समर्थक सरकार का बुलडोजर नहीं आया है। ये भेदभाव का उदाहरण है। अगर सरकार वाकई सबको साथ लेकर चलने के नारे पर काम करती है तो यह भेदभाव क्यों? सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए। सभी के साथ समानता रखनी चाहिए। पुलिस प्रशासन को भी न्याय के मुद्दे पर निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। चोरी के इरादे से घर में घुसने का आरोप लगाकर उसे पीटा गया और मार दिया गया। अगर ऐसा भी था तो क्या इन लोगों को कानून पर भरोसा नहीं था। पकड़ कर पुलिस को क्यों नहीं सौंपा। ये महज भीड़ हिंसा है। अपने कृत्य को छिपाने के लिए इसे चोरी से जोड़ा जा रहा है। इसका वीडियो फुटेज साक्ष्य है। जिसमें जांच की कोई जरूरत नहीं है। सीधे कार्रवाई होनी चाहिए।
1 जुलाई से भीड़ हिंसा पर नया कानून लागू होने जा रहा है। हम प्रयास करेंगे कि उसी कानून के अनुसार इस मुकदमे में कार्रवाई हो। मामले में न्यायिक जांच भी हो, ताकि सच सामने आए। अगर किसी तरह की रियायत आरोपियों के प्रति बरती गई तो विधानसभा व संसद में मुद्दा उठाया जाएगा। सपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर जो हालात बन रहे हैं। आने वाले चुनाव में भाजपा का प्रदेश से सूपड़ा साफ हो जाएगा। सरकार अपराध पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती है। मगर ऐसा है नहीं। एक सवाल पर नेताओं ने कहा कि उनके किसी नेता ने भड़काऊ बयान नहीं दिया। बयानों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डीएम स्तर से व बाकी शासन स्तर से मुआवजा दिलाने का भरोसा दिलाया गया है। बाकी मुद्दों पर भी भरोसा दिलाया है। इस मामले में अब सपा अध्यक्ष को रिपोर्ट दी जाएगी। फिर आगे कदम उठाया जाएगा।
ये नेता रहे प्रतिनिधि मंडल में
संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, कांठ के विधायक कमाल अख्तर, पूर्व सांसद चौ. बिजेंद्र सिंह, सपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मीधनगर, सपा महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोषी, पूर्व जिलाध्यक्ष शिशु पाल, जिला महासचिव मनोज यादव, पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इश्हाक, अल्पसंख्यक सभा के महानगर अध्यक्ष मो. अनीस, युवजन सभा के निवर्तमान महानगर अध्यक्ष आमिर आबिद, संतोष जाटव, शिवकुमार राजौरिया, सलाउद्दीन अब्बासी के अलावा बाबा फरीद आजाद, रंजीत चौधरी आदि भी मौजूद रहे।